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कविताएं (Volume 5) - Akriti Srivastava


⋇⋆✦⋆⋇ खुदा क्या मै तुझे पसंद नहीं  ⋇⋆✦⋆⋇ 

ए खुदा क्या मै तुझे पसंद नहीं 
मुझे बना कर तू भूल गया क्या 
गम सारे देकर खुशियाँ देना भूल गया क्या 
मुझे रूला कर हँसाना भूल गया क्या 
उससे मिला मिलाना भूल गया क्या 
मुझे बना कर तू भूल गया क्या 
देकर सारी मुश्किले आसानी देना भूल गया क्या 
करा कर सारी मेहनत आराम लिखना भूल गया क्या 
छोड़ बीच मझधार में किनारे पर लाना भूल गया 
मुझे बना कर तू भूल गया क्या  


⋇⋆✦⋆⋇ काश वो मुझे  ⋇⋆✦⋆⋇ 

काश वो मुझे सच मे प्यार करता 
अपनी मोहब्बत का इजहार करता
मेरे साथ सारे वादे निभाता 
जो मै रूठ जाती मुझे वो मनाता
काश वो मुझे सच मे प्यार करता 
मोहब्बत की सारी दास्ताँ सुनाता
मेरे साथ अपनी उम्र गुजारता
मेरे लिए चाँद तारे वो लाता
मुझे भी कोई होता जो हँसाता
काश वो मुझे सच मे प्यार करता 


⋇⋆✦⋆⋇ तुम थे तो  ⋇⋆✦⋆⋇ 

तुम थे तो बहारे थी 
तुम थे तो चाँद था 
आसमां भी खुबसूरत था 
जमीं पे रौनक थी 
तुम बीना सब बेनजारे है
मौसम है पर खुशबू नहीं 
आसमां पर चाँद तो है पर उसमे चमक नहीं है 
तुम सितारों से थे जो रात मे ही निकल कर 
अपनी चमक से सब कुछ रौशन कर दे 
तुम हवा की खुशबू हो जो अपनी महक से ही 
सब कुछ खुद पर फिदा कर दे 
जो एक पल मे मन को हल्का कर दे 
पर वो खुशबू वो रौनक वो रौशनी 
मैंने खो दिया क्योंकि मैंने शायद 
तुझे ही खो दिया 
पर मैंने चाहा नहीं था ऐसा 
तुझे खो कर भी मै ऐसे हूँ जैसे 
तितली खो देती है अपना रंग 
जैसे चाँद बिना आसमां सुना 


⋇⋆✦⋆⋇ बेवफा इश्क  ⋇⋆✦⋆⋇ 

क्या मिला तुझे मुझे यूँ तोड़ कर 
मुझे अन्दर तक झकझोर कर 
मै तो बस साथ चाहती थी तेरा 
और तूने खेला मुझसे खिलौना समझ कर
तेरे बाद मैनें नजर उठा कर किसी और को नहीं देखा
और तूने तो नजरें ही नीचे नही कि कभी 
मैंने चाहा था तुझे पागलो की तरह 
और तूने तो सच मे पागल ही दिया कर 
बेवफा था तू ये न जानते थे हम 
बस खुद से ज्यादा तुझे चाहते थे हम


⋇⋆✦⋆⋇ दिल के दर्द    ⋇⋆✦⋆⋇ 

लिखते दिल के दर्द को 
उन कोरे कागज के पन्नो पर
और बाँधे फिर उन पन्नों को 
अपने आंसू के धागे से 
जब दर्द लिखा उन पन्नों पर 
रोया एक एक शब्द वहां 
लिखा अपने जज्बातो को 
लिखा अपने एहसासों को 
कुछ खुशी लिखी कुछ दर्द लिखा 
दिल का है एक एक मर्ज लिखा


⋇⋆✦⋆⋇ तेरी याद जब आती हैं    ⋇⋆✦⋆⋇ 

तेरी याद जब आती हैं 
तो आखों से जुल्फ हटा लेते हैं 
सोच कर तुझे अपने साथ 
खुद को थोड़ा सवार लेते हैं 
तेरी याद जब आती हैं 
आखों से आँसु हटा लेते है 
पलकें बंद कर थोड़ा मुस्कुरा लेते है 
गर आये कोई और नजरों के सामने 
तो खुद की नजरें झुका लेते हैं 
तेरी याद जब आती हैं 


⋇⋆✦⋆⋇ एक अजनबी   ⋇⋆✦⋆⋇ 

वो मिला मुझे अजनबी की तरह 
फिर दिल में बसा एक खुशी की तरह 
है रिश्ता क्या उससे मै नहीं जानती 
पर उसका कहा सब कुछ हूँ मानती
मुझे हँसाने की कोशिश बार बार करता है 
हँसा कर ही मुझे वो दम भरता है 
मेरी हर एक बात को याद रखता है 
खुश रहा करो यारा हर बार कहता है 
है अंदाजा नहीं वो आया क्यो
मेरे गम को उसने भुलाया क्यो 
मैं सालो से उसे नहीं जानती 
बस कुछ दिन की है यारी
पर ना जाने क्यों ऐसा लगता है 
जैसे मेरी वो बाते जानता हो सारी


©Akriti Srivastava 

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