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कविताएं (Volume 3)- Kajal Singh


कुछ इस कदर तुझसे जुड़ा रिश्ता हमारा 
की तेरे नाम के साथ मेरा नाम जुड़ गया.. 

कि जब भी मैं अपनी पहचान लेके निकलती हूँ
लोग मुझे तेरे नाम की पहचान दे देते हैं, 

तुझसे दुर हुए जमाना हो गया है
लेकिन तेरे नाम का बंधन आज भी वैसे नया
है जैसे तुने अपने नाम के बंधन से जोड़ा था.


इस दिल को किसी का इंतज़ार है
आजकल बस उसी का ख्याल है
रात हो या दिन हो बस हर जगह
 उसी का ख्वाब है जिसका मुझे
इंतज़ार है.. 
जितनी खुशियाँ हो सके मै
उसपे लुटा दूँगी, 
बस एक बार वो कह दे की
हाँ मै वही हूँ जिसका उसे इंतज़ार है..


तेरे मेरे बीच में बस फर्क इतना है
कि तेरे जाने के बाद आज भी उन पलों मे ही जिती हूँ
जिन पलो को जाने के बाद आज भी तु
पीछे मुड़ के नहीं देखता है... 💔


बेरुखी से है ये ज़िंदगी आस बहुत लगवाती है
आज की फिक्र छोड़ के ,
ये कल की फिक्र करवाती हैं
बेरुखी से है ये ज़िंदगी आस बहुत लगवाती है.. 
आज जो मेरे पास हैं , 
शायद कल वो होगा की भी नही
फिर भी उसके होने का आस लगवाती है.. 
 बेरुखी से है ये ज़िंदगी आस बहुत लगवाती है.. 
चारों तरफ आज खुशियों का साया है, 
गम का कोई साया नही
ना जाने फिर भी ये दिल 
किसकी आस लगा के बैठा है.. 
 बेरुखी से है ये ज़िंदगी आस बहुत लगवाती है..


किस हक से मांगू साथ तेरा
 कि इस जन्म ही क्या अगले जन्म के लिए भी
 मेरे बंधन मे बंध जाओ.. 

किस हक से तुझे अपने प्यार का पैगाम दु
की तु पढ़ के सिर्फ मेरा बन जाये.. 

किस हक से तुझपे अपनी नाराजगिया जता सकूँ
कि तु सब कुछ भूल के मुझे मनाने बैठ जाये..


ये तेरे मोहब्बत का ही नशा है जो
मैं हर वक़्त उसमे डूबा रहता हूँ
और चाह के भी तेरी यादों से बाहर
निकलता नहीं हूँ.. 

जब से मै तेरे जुल्फों के छावँ मे सर रखा हूँ .. 
तब से मैंने किसी और के 
छावँ मे सर रखा ही नहीं हूँ .. 

मेरे इस चाहत को तुम मेरी नादानियां समझो
या मेरा पागलपन समझो 
लेकिन सच कहता हूं, 
जब से एक दफा तेरे चहेरे को देखा हूँ 
तब से हर दफा तेरा ही चेहरा देखता हूँ..


अभी ये हाल है की बिन
 तेरे जीने की सोचती हूँ
तो ये आँखे नम हो जाती हैं.. 
सोचो जिस दिन तुमसे जुदा हो गयी
उस दिन तो मेरी साँसे रुक जायेगी..


मेरी बिटियाँ रानी बड़ी सयानी 
घर में हर रोज करती शैतानी
दादा दादी को अपने पीछे भगाती
और खुद मेरे पीछे आ छुपती.. 
खुद करती रहती है दिन भर 
शैतानी और पापा से करती है
सबकी शिकायत.. 
पापा की दुलारी है तो दादा की जान है
मेरी बिटियाँ रानी...


बड़ी सौभाग्य से मिलती है बेटियाँ
जो जन्म लेती है किसी के आगन मे.. 
लक्ष्मी के स्वरूप जैसी होती हैं बेटियाँ
जो आते ही घरों में खुशियों की 
बरसात कर देती है .. 
अपनी किलकारियो की गुन्ज से 
पुरे घर में रौनक बिखेर देती है बेटियाँ
जिस घर में पुरा बचपन बिताती है
एक दिन उसी घर के लिए पराई हो जाती हैं
बेटियाँ..


©Kajal Singh 

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