Independence day
75 साल पहले मिली थी अजादी हमको,
पर दिल पर हाथ रखकर पूछो?
मिल पायी है क्या सच मे अजादी हमको?
हर दिन रेप के किस्से सुनती हूँ मैं,
कब मिलेगी आजादी से ?
बस यही सोचती हूँ मै।
बेटे की चाह में,
बेटी मारी जाती है।
हर दिन किसी नुक्कड़ पर ,
एक बेटी फेंकी जाती है।
प्यास अपनी वो बुझाता है,
ना माने तो ऐसिड फेंका जाता है।
कब मिलेगी आजादी इससे?
यही सोच मेरा तो दिल घबराता है।
अंग्रजो से तो दिला दी आजादी ,
दरिंदो से भी आजादी दिलवओ ना।
हर बेटी की किस्मत में,
अब तो फूल खिलाओ ना।
अब तो फूल खिलाओ ना।।
अफसोस है हमें
अफसोस है हमें,
कि साल बीत गये लिखते हुए,
पर ना लिख पाये हम,
दर्द उस बूंद का,
जख्म उस पँछी का,
राज इस दुनियाँ का,
मंजिल उस राही की,
तडप उस गरीब की,
कीमत उस आसूँ की,
ना लिख पाये हम,
यादो की दुनियाँ उस फौजी की,
कहानी उस बेरोजगार युवा की,
अफ़सोस है हमें,
चलायी कलम पर सिर्फ अपने स्वार्थ की,
ना लिख पाये हम कहानी किसी की।।
क्यों?
क्यों हर रोज मैं खुद से लडती हूँ?
खुद - खुद से सौ सवाल करती हूँ,
हर रात मैं खुद से नफरत करती हूँ,
हर सुबह मैं एक नयी जंग के लिये निकलती हूँ,
क्यों हर रोज लोगो के नये रंग देखती हूँ?
क्यों हर रोज मै यही सब करती हूँ?
By : Mitali Mahajan
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