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कविताएं (Volume 1) - Mohan Lal Arora

⋇⋆✦⋆⋇ रचना ⋇⋆✦⋆⋇

💐 कोमल मन 💐 

स्नेहिल कोमल मन मे
उल्लास अंकुरित होता है 
निशब्द निषर्ग जीवन में 
हृदय पल्लवित होता है 

कष्टप्रद पथ के पथिक
मे ही नैराश्य सुलगता है 
जीने की अभिलाषा से 
उर मे माधुर्य पनपता हैं 

कलुषित वाणी से सदैव 
ही शब्द विष मय होता है 
श्रेष्ठ विचारों के सृजन से
जीवन सुख मय होता है 

आल्हादित हृदय में ही
प्रेम का उपवन होता है 
सत्यप्रिय ध्येय निष्ठा से 
जीवन मधुवन होता है 

सकल भोग्य पदार्थो के
मिले अनेक उपसार है 
परम पिता परमात्मा के
"मोहन"पर अंनत उपकार है ।।

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा
9896853750

💐 ठोकर 💐 

नही रोड़ा मैं किसी के भी रास्ते का 
सपने देखने का हौसला मैं भी रखता हूँ 
चाहे छुपा लो सितारों को उजालो मे तुम 
नजर भर उन्हें मै भी ताकता हूँ
रखा है रास्तों ने ठोकर पर तेरी चाह
पर मंजिलो पर नजर मै भी रखता हूँ 
जाने कितने कदम गुजर गए यूँ ही
हर कदम के निशान याद मै भी रखता हूँ 
भटक जाते है लोग अक्सर यहाँ भी 
पते उनके रास्तों के याद मै भी रखता हूँ 
नहीं समझेगा कोई तेरी ठोकर के दर्द को
यह इल्म तो बस मै ही रखता हूँ 
गुजर जाते हैं लोग खामोशी से ठुकरा कर
उनके दर्द की कहानी मै ही याद रखता हूँ 
मिलेंगे तुझसे,,, जब तु खाक ऐ सपुर्द होगा
इंसानो की हस्ती को बस मै ही समझता हूँ 
ना लगे कोई ऊपर वाले ,,,की ठोकर
उस ठोकर का दर्द बस मै ही समझता हूँ 

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा
9896853750


💐 मेरे पिता 💐  

मुझे था अपने पिता जी पर बहुत नाज
था कोमल मन और सदृढ आवाज 
शांत स्वभाव और खुश मिजाज 
ना कभी गुस्सा ना ही कभी नाराज

शायद मेरी हर बात जानते थे 
मेरी हर नब्ज पहचानते थे 
हर काम में सहयोग करते
और मेरी हर बात मानते थे

कड़ी मेहनत और लग्न से हमे पढाया
ऊँची शिक्षा दिला कर डाक्टर बनाया 
आर्थिक, सामाजिक शिक्षा का ज्ञान बताया
धार्मिक और परिवारिक संस्कार का पाठ सिखाया

क्या लेना क्या देना का गणित समझाया
चोरी और झूठ से कोसो दुर भगाया  
नीति और नियत का मतलब बताया
भूखे को रोटी असहाय की मदद का फर्ज सुनाया 

मेरे गुरु मेरे मित्र थे मेरे पिता 
मेरा अस्तित्व, मेरा मान, थे मेरी पहचान 
मेरी माँ के माथे का सिंदूर, थी माँ की शान
स्पष्टवादी ,राष्ट्रवादी थे नेक दिल इंसान 

हे भगवान, हे पालनहार, हे दाता
मोहन करे बिनति मुझे हर जन्म 
देना यही पिता,,,देना यही पिता 
मेरे गुरू मेरे मित्र थे मेरे पिता ।।।

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा हरियाणा 
9896853750

💐 ठोकर 💐 

नही रोड़ा मैं किसी के भी रास्ते का 
सपने देखने का हौसला मैं भी रखता हूँ 
चाहे छुपा लो सितारों को उजालो मे तुम 
नजर भर उन्हें मै भी ताकता हूँ
रखा है रास्तों ने ठोकर पर तेरी चाह
पर मंजिलो पर नजर मै भी रखता हूँ 
जाने कितने कदम गुजर गए यूँ ही
हर कदम के निशान याद मै भी रखता हूँ 
भटक जाते है लोग अक्सर यहाँ भी 
पते उनके रास्तों के याद मै भी रखता हूँ 
नहीं समझेगा कोई तेरी ठोकर के दर्द को
यह इल्म तो बस मै ही रखता हूँ 
गुजर जाते हैं लोग खामोशी से ठुकरा कर
उनके दर्द की कहानी मै ही याद रखता हूँ 
मिलेंगे तुझसे,,, जब तु खाक ऐ सपुर्द होगा
इंसानो की हस्ती को बस मै ही समझता हूँ 
ना लगे कोई ऊपर वाले ,,,की ठोकर
उस ठोकर का दर्द बस मै ही समझता हूँ 

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा
9896853750

💐 भाव 💐 

भाव अपने ढक लेता हूँ 
इरादो से हमेशा
घिर ही जाता हूँ 
फिर भी विवादो से हमेशा 

भाव हैं नेक कर्म करना
बदी का लगाते है दाग 
हमारी जिंदगी का फलसफा
लगाते हैं कहाँ कहाँ दिमाग 

हमारी खुशी उनकी कड़वाहट
फिर भी भाव होय सच्चा 
झुठे वादो की बनावट 
हमे भला समझते बच्चा

उनको सारी खुशीया मुबारक 
किये थे जो कस्मे वादे
समझ गए थे भाव हमारे
तभी तो बदल गए इरादे

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा हरियाणा

💐 भारत माता 💐 

भारत माता जग विख्याता
कृपा करते सदैव विधाता 
तेरा वंदन तेरा अभिनंदन 
जग मे ऊँचा नाम रहेगा
हो युग युग तक जग वंदन 
तुझ से ही पैदा हूऐ
तुझ में ही समा जाएगे
तेरे ही आँचल में खिलकर
पल कल तेरी ही शान बढायेगे
तू ही ज्ञान मान की माता
भारत माता जग विख्याता
उज्जवल पावन तेरा आँचल 
फहरे गगन में प्यारा
विश्व में यश की किर्ति पताका
देखे जग यह सारा
तेरा कण कण तिरथ पावन 
जल धाराओ से सिंचित
गौरव गाथाऐ स्वदेश की
है बलिदानो से निर्मित 
स्नेहमय तू भावमयी तू
तेरी अमर कहानी 
हे भारत भूमि महान
तुझे करे हम कोटी कोटी प्रणाम 
जग वंदन तेरा अभिनंदन 
भारत माता जग विख्याता
तेरा वंदन तेरा अभिनंदन 

डाँ मोहन लाल अरोड़ा सिरसा हरियाणा 
drmlarora7@gmail

🌹 शिक्षक है अनमोल 🌹 

शिक्षक है अनमोल
बड़े मीठे है इनके बोल 
शिक्षक है अनमोल 
संस्कृति,राजनीती,धार्मिक,आर्थिक
सब है पढाते हमे
सच्चाई पर कहते मीठे बोल 
शिक्षा की गठड़ी लेते हैं खोल
शिक्षक है अनमोल 
अच्छे बुरे का पाठ पढाये 
चोरी द्वेष से दुर हटाये 
राष्ट्र प्रेम का राग सिखाये 
देश उन्नति की दिशा बताऐ 
जीवन का मार्ग देते खोल
बड़े मीठे है इनके बोल 
शिक्षक है अनमोल 
नफा नुकसान सब समझाते 
अपने पराये का पाठ पढाते 
सारे संसार का नक्शा बताते 
इतिहास भूगोल भी दोहराते 
सब त्यौहारो का बताते मोल
बड़े मीठे है इनके बोल 
शिक्षक है अनमोल 

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
सिरसा हरियाणा 
drmlarora7@gmail

🌹 हमारी जिज्ञासा 🌹 

कभी खत्म ना हो 
हमारे मन की जिज्ञासा 
जीवन में आ सकती है 
कभी भी कोई निराशा 
ना हो हम कभी विचलित 
हर सुबह लेकर आयेगी आशा
कभी खत्म ना हो 
हमारे मन की जिज्ञासा 
ना किसी से द्वेष ना रखो बैर
यही है प्यार की परिभाषा 
सभी मिल ज़ुल कर रहे
जीवन का यही रहन वासा
कभी खत्म ना हो 
हमारे मन की जिज्ञासा 
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई 
आपस में भाईचारे की आशा
देश को विकासशील बनाये 
यही है हम सब की अभिलाषा 
कभी खत्म ना हो 
हमारे मन की जिज्ञासा 

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा हरियाणा 

🌹अपनी महफिल 🌹 

सच्ची बात मै बताऊ
अपनी महफिल का हाल सुनाऊ
बहुत बड़ी थी प्रतियोगिता 
दुर दुर से आये प्रवक्ता 
कवियों की संख्या थी भारी
मठाधीश कुछ साधु पुजारी 
किस किस का नाम बताऊ
अपनी महफिल का हाल सुनाऊ
न्यायधीश अधिकारी नेता 
पुलिस प्रिंसिपल अच्छे वक्ता
पद नामी मशहूर थे शायर
बड़े व्यक्तित्व थे जग जाहिर
बार बार सबके गुण गाऊ
अपनी महफिल का हाल सुनाऊ
तरह तरह की गीत कहानी 
कोई कोई सुनाये मुँह जुबानी
बहुत मजा आ रहा था सुन कर
तालियाँ भी बस रही थी जम कर
अब आगे का मजबून बताऊ
अपनी महफिल का हाल सुनाऊ
सम्मान पत्र सबको मिलने थे
कुछ नामची पहले से अकड़े थे
बार बार सब ऊँचे स्वर मे
हुड़दंग मचा रहे थे महफिल मे
समय देख मै क्या कह पाऊ
मोहन की महफिल का हाल सुनाऊ
सच्ची बात मै बताऊ
अपनी महफिल का हाल सुनाऊ

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा हरियाणा 
9896853750🌹अपनी महफिल 🌹 

💐 अर्थी 💐 

सजने लगी अर्थी हमारी
कितने कंधो पर पड़ेगी भारी
रोने लगी पत्नी हमारी
थी बेचारी किस्मत की मारी
समझाने लगी जनता सारी

चलने लगी जब अर्थी हमारी
कंधा दे बेटा साथ में बेटी बेचारी
पोते ने किया नमन मारी किलकारी 
बहु बेटे को भी लगी चित्कारी
समझाने लगी जनता सारी 

आगे बढी जब अर्थी हमारी 
रिति रिवाजो की थी भरमारी 
निभने लगी रिस्ते और नातेदारी 
यह सब है दुनिया दारी
समझाने लगी जनता सारी 

पहुँची जब शिव धाम में अर्थी हमारी 
होने लगी दाह संस्कार की तैयारी 
किसी ने शाल किसी ने चद्दर वारी
यह थी हमारी आखिरी सवारी
समझाने लगी जनता सारी 

चिता पर सजी जब अर्थी हमारी 
दे मुख अग्नि रित निभाई सारी
हम से हमारी जिंदगी हारी
आज हमारी कल आपकी बारी
समझाने लगी जनता सारी 

सजने लगी जब अर्थी हमारी 
समझाने लगी जनता सारी 

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा
आहालातश

💐 उम्मीद 💐 

फिर खिले अमन चमन 
अगन मगन हो हर वीर
कांधे न हो आक्सीजन
बच्चे बिन बैग अधीर 
गली गली हो वैन स्कूल 
एंबुलैंस ना दिखे तीर
सब दुकाने कतारे
दवाखाने ना भीड़ 
काढा ना चाय चुस्की 
हो अच्छी तकदीर 
बेख़ौफ सभी घुमे 
संग रहे तदबीर
फिर से खिले चमन 
सुरम्य हिंद तस्वीर 
फिर से भारत माटी हो 
चंदन और अबीर 
टैरेस न मंदिर में 
दादी चढावे नीर
हाथ ना कैरम लुडो
बच्चे बिन बैट अधीर 
सन्नाटो से पिंड छुटे
हो चहल पहल भीड़ 
सारी पाबंद हट जाए
मन हो सकल अधीर
हिल मिल कर सब रहे
गाँव शहर घर वीर
तज सपन बीते बुरे
नैना खुशी नीर
फिर से खिले चमन
सुरम्य हिंद तस्वीर 
फिर से भारत माटी हो 
चंदन और अबीर 

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
13-5-21
9896853750
********


©Mohan Lal Arora

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