⋇⋆✦⋆⋇ Markande ji Love Story❤️🌎 ⋇⋆✦⋆⋇
गुजरता था जिस गलियों से मै हरदिन ,2..
वो गलिया भी सूनी हो गयी अब तेरे बिन
जिस गुलाब को जरिया बना कर दिल अपना तुझे दिया था 2...
वो दिल तो टूट ही गया साथ धड़कन भी थम सी गयी उन कलियों में,
यू तो महफ़िल आज भी जमती ह हजारो की(2..), मगर कमी खलती ह तुम्हारी उन गलियो में,
जब भी गुजरता था उस गली से, निगाहे मिलती थी तुम्हारी हमसे(2..)
उस एक पल में कितना कुछ कहकर, तूम शर्मा सी जाती थी।
ओर देता मैं उत्तर उन बातों को समझकर ,
इतने में तुम्हारी माँ जी आजाती थी
माता जी के डर से अपने घर आ जाता,
और घर आके आपनी माता से दाट खाता
दाट खाते वक़्त भी तुम्हारी याद आ जाती थीं,
भावनाये कुछ भी चहरे पे लेकिन मन मे मुस्कान आ जाती थी।
समय बीत गया .......
हम मिलने लगे,
इन मुलाकातों से कब दोस्ती और कब प्यार हुआ पता ही न चला
एक दिन की बात है
घर मे गुलाब की कली देखकर ,इज़हार-ए-मोहब्बत का सोच लिया ,
ओर घर वालो से बच कर ,वो गुलाब मैने तोड़ लिया,,
साम का समय था मुलाकात हुई उनसे,
साथ बैठकर कुछ बात हुई उनसे।
फिर एक घुटने के बल बैठ कर उन्हें इजहारे दिल स्वरूप गुलाब दे दिया
न जाने कब से उनको इसका इंतजार था,
निगाहों से हा कर दोनो हाथो से गुलाब ले लिया।
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©Bobby Markande
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