ये इश्क , प्यार और मोहब्बत,
आज - कल सबके सिरहाने होता है,
यहाँ के हर मुसाफिर और उनको,
चाहने वालों का हि तो , ये जमाना होता है,
जो आपको चाहता है,
उसे खुश करने के लिए,
कभी कोई तोफा तो कोई गुलदस्ता लाना पडता है,
जो उनके लिए तो होता है नजराना,
पर हमे जो चुकाना पडता है, वो तो उसका जुर्माना होता है,
हम तो नही है, कोई साँकी या शराबी,
ये तो उनकी आंखो से चढ गयी,
उनको देखते है तो उनकी आंखो से दिल तक,
जाना चाहते है,
पर उस दिल तक के रास्ते में,
एक मैखाना आता है,
By- Vinod Dhage

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