Welcome to IconicQuote. Search your name by Alphabet. Open your page via Url. Read your favorite writer's Quote.

Search your name

डायरीनामा (Sidheshwar)

 डायरीनामा

       देश की धरोहर है देश प्रेम से परिपूर्ण लघुकथाएं 


°°°°°°°°°°°°°°°° 0 सिद्धेश्वर °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°


                   🔮 स्वाधीनता दिवस का 75 वां वर्ष यानि आजादी का अमृतोत्सव पूरे देश भर में सरकारी स्तर पर, जोर शोर से मनाया जा रहा है !

                       दुश्मन के चंगुल से मुक्त होकर, आजाद जीवन जीना, कोई छोटी बात तो है नहीं ! वह भी तब, जब देश के आन-शान की बात हो l देश की आजादी के लिए न जाने कितने जवान देशभक्त कुर्बान हो गए , शहीद हो गए ,

ताकि हमारे देश को, हमारे देशवासियों को पराधीनता यानी गुलामी से मुक्ति मिले और हम खुले आकाश के नीचे, खुली हवा में सांस ले सकें l 

                            ऐसी आजादी पाने की खुशी किसे नहीं होगी ? लेकिन यह खुशी सिर्फ सरकारी स्तर पर क्यों ? देश के करोड़ों जनता को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति मिली, तो फिर जश्न -ए -बहार का असली हकदार तो हमारी जनता ही है न !

                            अब सवाल यह उठता है कि आज हम कितने आजाद हैं कितने गुलाम हैं यानी अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त होकर हम अपनों के गुलाम तो नहीं हो गए ? देश की आजादी के लिए, देश के लिए मर मिटने वाले शहीदों से प्रेरणा लेकर, हमें अपने कर्तव्य, अधिकार की आजादी भी तो चाहिए ? जिसे चाहे अनचाहे, स्वयं से -स्वयं के लिए, हर भारतवासी को चाहिए या नहीं ?

                       एक और सच यह भी है कि हमने देश की आजादी यानी बोलने, लिखने, पढ़ने, सुनने की आजादी का नाजायज फायदा तो नहीं उठा रहे हैं ? जिसके विरोध में दशकों पहले देश को आपातकाल के लिए शर्मसार होना पड़ा था ? हमारे देश में ऎसी स्थितियां बार-बार न आए, इसकी जिम्मेदारियां हमारे लिए भी बनती है या नहीं ?

                                 ये जिम्मेदारियां यानि हम सब की जिम्मेदारियां ! चाहे वह व्यक्ति सत्ता में हो, सरकारी कार्यालय में हो, घर में हो, खलिहान में हो, बाजार में हो या दुकान में हो, हमें अपने अपने क्षेत्र में, अपनी अपनी जिम्मेदारियों को भली-भांति समझने की जरूरत है या नहीं ?

         जनता के साथ बड़े-बड़े वायदे करने के बाद, सत्ता की कुर्सी हथियाते ही, भ्रष्टाचार के आकंठ में डूब जाना, मंच पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले दोगले नेताओं द्वारा, जनता के अधिकारों का जमकर शोषण किया जाना, हमारे देश की आजादी का दुरुपयोग करना है या नहीं ??

                    हमारे परिवार में से अधिकांश लोग नौकरी और व्यवसाय के माध्यम से जमकर जनता का शोषण करते हैं ! भ्रष्टाचार के आकंठ में डूब जाते हैं रिश्वतखोरी को अपने अधिकार का एक अंग समझने लगते हैं ! सफेदपोश लोग, काले-कारनामे करने की दौड़ में सबसे आगे रहना चाहते हैं ! गरीबों पर अत्याचार करते हैं ! आदर्श और नैतिकता को सिर्फ किताबी ज्ञान मानते हुए, ढेर सारे कुकर्मों को अपने जीवन की दिनचर्या में जोड़ लेते हैं ! यह सब कुछ देश की आजादी का दुरुपयोग करना है या नहीं ?

                         कौन नहीं जानता कि देश की सर्वोच्च अदालत की आंखों पर काली पट्टी जो बंधी रहती है, और सच और झूठ को देखने की हिम्मत रखते हुए भी, सचमुच अंधी ही बनी रहती है ! पैसों की खनक की आवाज ऊंची न्यायिक प्रक्रिया पर धब्बा लगाते हुए, अपराधियों को मुक्ति और निरापराधियों को सजा सुना देती है ! यह सब कुछ देश की आजादी का दुरुपयोग करना है या नहीं ?

                        सारी स्थितियों के बावजूद हमारे देश की यह मान्यता है कि हम अपनी आजादी गंवाना नहीं चाहते ! हमारे देश में कई ऐसे न्यायमूर्ति और वकील हैं, जो पैसों की खनक नहीं सुनते, दौलत पर नहीं बिकते हैं ! और ऊंचासीन अपराधियों को भी जेल के हवाले कर देते हैं ! ऐसे कई उदाहरण हमारे देश में मौजूद है !

                            हमारे देश में ही कई ऐसे लोग हैं, जो आजादी का समुचित उपयोग करते हुए, गरीबों की मदद करते हैं ! भ्रष्टाचार से खुद को अलग रखते हैं ! आदर्श और नैतिकता को अपने दैनिक जीवन का अंग समझते हैं शत-प्रतिशत ना सही, किंतु एक बेहतर इंसान बनने की प्रक्रिया में, खुद को हैवान बनाने से बचाए रखते हैं, यानि संवेदनशील बने रहते हैं !

                          ऐसे ही संवेदनशील प्राणियों में एक जीव रचनाकार , जो श्रमसाध्य काम करते हुए , अपने जीवन के मूल्यों को समझते हुए, समाज की विसंगतियों पर अपनी कलम से लगातार प्रहार कर रहा होता है और सामाजिक विसंगतियों को दूर करने के लिए ही नहीं, अपने जीवन मूल्यों को बचाए रखने के लिए, देश की आजादी को सुरक्षित रखने के लिए भी ऐसी प्राणवान रचना करते हुए, अपने जीवंत और ओजस्वी शब्दों द्वारा, कविता, कथा-लघुकथा तथा वैचारिक आलेखों का सृजन करते रहता है !

                                        यह कौन नहीं जानता कि कलम के धनी प्रेमचंद ने अपनी कथा- लघुकथा के माध्यम से देश की आजादी के लिए अपनी अहम भूमिका का निर्वाह किया था ! दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे और अंग्रेजों को उनकी पुस्तकें जलाने के लिए मजबूर होना पड़ा था ! इन प्रसंगों को कौन नहीं जानता ?

                 ऐसी शक्ति होती है, शब्दों में ! यह तो मात्र एक उदाहरण है !देश के लाखों रचनाकारों ने इस सृजनकर्म को निभाया है और निभा रहे हैं ! यूं ही कोई नहीं कह गया है कि -

" ना तीर निकालो, ना तलवार निकालो !

   जब तोप मुकाबिल हो, तब अखबार निकालो !!"

                      यह अखबार चंद पन्नों का अखबार नहीं, शब्दों की उस तीव्रता का परिचायक है, जो कभी कहानी, तो कभी कविता, तो कभी लघुकथा के सांचे में ढलकर, अभिव्यक्ति की आजादी के परिदृश्य को रेखांकित करती है! 

         क्योंकि वर्तमान समय में साहित्य की सर्वाधिक लोकप्रिय और पठनिया विधा लघुकथा है, इसलिए भी स्वाधीनता के परिदृश्य में लघुकथाकारों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है ! ऐसे हजारों लघुकथाकार हैं, जो इस जीवन मे व्याप्त विसंगतियों से मुक्त होने के क्रम में, देश की आजादी के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए, अपनों की गुलामी से मुक्ति पाने के लिए, मुक्त रहने के लिए, देश की आजादी के संरक्षण के लिए, देशभक्ति पूर्ण कविता, कहानी के अतिरिक्त लघुकथाओं का सृजन करते रहे हैं ! ऐसे प्रतिनिधि लघुकथाकारों में जो नाम तुरंत याद आ रहे हैं, समकालीन लघुकथाकारों में से कुछ नाम हैं - चित्रा मुद्गल, विष्णु प्रभाकर, राकेश बतरा, कमल चोपड़ा भगवती प्रसाद द्विवेदी, रामयतन यादव, रशीद गौरी, सुरेश सुपेकर, कमलेश भारतीय, बलराम, नरेंद्र कौर छाबड़ा, डॉ योगेंद्रनाथ शुक्ल,डॉ शरद नारायण खरे, सिद्धेश्वर, मधुदीप,डॉ अनीता राकेश, डॉ पुष्पा जमुआर , डॉ सतीशराज पुष्करणा, रामनिवास मानव,तस्नीम, ऋचा वर्मा, विजयानंद विजय आदि l यह नाम सिर्फ उदाहरण है ! इस तरह के हजारों लघुकथाकार स्वाधीनता के परिदृश्य में अपनी श्रेष्ठ और सारगर्भित लघुकथाओं का सृजन कर रहे हैं l इन लघुकथाकारों ने, अपनी लघुकथाओं में, देश प्रेम का अंकुर डालने में सफलता अर्जित किया है,और ऐसी लघुकथाएं साहित्य की नहीं बल्कि देश की धरोहर होती है l भला इन बातों से कौन इनकार कर सकता है कि देश की धरोहर है देश प्रेम से परिपूर्ण लघुकथाएं ! Ooo


°°°°°°°°°°°°° [ सिद्धेश्वर ] °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

 ~l~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

 : ( पूरा पता):

 0 सिद्धेश्वर,"सिद्धेश् सदन" अवसर प्रकाशन, (किड्स कार्मल स्कूल के बाएं) / द्वारिकापुरी रोड नंबर:०2, पोस्ट: बीएचसी, हनुमाननगर ,कंकड़बाग ,पटना 800026 (बिहार )मोबाइल :92347 60365 ईमेल:sldheshwarpoet.art@gmail.com

••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••







••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• 


©सिद्धेश्वर

*******************************


आप मेरी रचनाओं को मेरे नाम से  या मेरे नाम के पहले अक्षर  "अ","ब","स" से सर्च कर पढ़ और शेयर कर सकते हैं...

और यदि  IconicQuote के पेज को बुकमार्क करतें हैं तो ये पेज आपके Browser से सीधे खुल जाएगा ।

आप अपने रचनाओं को अपने दोस्तों से शेयर कर सकते हैं ...

कमेंट सेक्शन में हमें अपने राय, सुझाव अवश्य दें...

एक -दूसरें की रचनाओं को पढ़कर आप उनके रचनाओं पर टिप्पणी कर सकते हैं, जिससे उनका भी मनोबल बढ़ेगा...

अपनें दोस्तों में यह लिंक शेयर करें और उनको भी मौका दें,
IconicQuote से जुड़ने का...


धन्यवाद

Post a Comment

0 Comments

Thanks for visiting to IconicQuote.Search your name by Alphabet.Open your page via Url.Read your favorite writer's Quote.