" " तू माँ हैं मेरी " "
तू माँ हैं मेरी ,
और मैं साया तुम्हारा
होने से तुम्हारे हैं वजूद हमारा
मेरी हर सांसों पर तुम्हारी सांसों का साया
दर्द हो मेरा और उस दर्द की तडप तेरी आँखो में भी हमेशा मैंने पाया
मुश्किल घड़ी मे हाथ तुम्हारा हमेशा मैंने अपने सर पर पाया
तुम्हारे वजूद से हैं मेरे वजूद का साया
तुम्हारी मुस्कुराहट ही हैं बस एक लक्ष्य हमारा
तू माँ हैं मेरी , और मैं साया तुम्हारा !
" माँ "
♡ माँ ♡
जो औलाद छोड़ दे तुझे भटकने को
उसकी कोई पहचान नहीं होती ,
फिर भी तू देती हैं उसे खुश रहने की दुआ
इसमें कोई बड़ी बात नहीं ,
हम लिखना तो बहुत कुछ चाहते हैं तेरी लिए ,
लेकिन जब तूने ही हमे लिखा हैं
तो हम कैसे लिखें तेरे लिए
इतनी हमारी औकात नहीं !
🙏🙏🙏🙏🙏
" अगर आसान होता "
रास्ते पर कांटे न बिछे होते,
मंजिल तक पहुंचना ।
अगर आसान होता लोगों को पहचानना
तो अपनों ने प्रहार न किया होता पीछे से।
अगर आसान होता,एक किसान की जिंदगी गुजारना
तो आज अन्नदाता ही भुखमरी से न मरता।
अगर आसान होता भुखे पेट को पालना,
तो आज इतना गलत काम न होता।
अगर आसान होता, मुर्झाए कलियों का खिलना
तो आज सारी वादियां खिलखिला रही होते।
अगर आसान होता, जीवन गुजारना।
तो आज सब इतने दुखी न होते।
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" चुप - बस अब चुप हो जाऊँ "
चुप 🤫
बस अब चुप भी हो जाऊँ
देर हुई काफी अब सो जाऊँ
रोके से नही रुकें आँशु
ढूंढे से नही मिलें कोई शब्द
छु लेने को आसमां रास्ता छोड़ा मैंने
हवाओं मैं गुम हूँ अभी
पुकारती बातो को सुनती नहीं
क्या होगी मंजिल खुद ही से दूर जाने के इस सफर में
और क्या साथी , मेरी ही परछाई अनजानी जिस डगर में ,
मालूम हैं मुझे अंजान तू भी नहीं ,
बस कुछ बिन कही सी बातो मेें मैं खुद से कहती रही ।
चुप 🤫
बस अब चुप हो जाऊँ
देर हुई काफी अब सो जाऊँ
ढूंढने खुद को मैं खुद ही में खो जाऊँ
इससे पहले कि आखों के रास्ते बह जाऊँ ,
क्यु न मैं बंद आखों से सो जाऊँ !
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" प्यारे पापा "
कोशिश की हैं आज थोड़ी सी हिम्मत जुटाई हैं
आज अपनी प्यारी कलम पापा के नाम पर चलाई हैं
थोड़ी सी तकलीफ क्या हुई हमें
उनके दिल पे तो जैसे आंधी आ जाती हैं ,
और देखकर सुकून में हमें
मानो उनके लिए तो हर दिन दिवाली आई हैं
जब करते हैं अपने बच्चों की बात
तो जमाने भर की खुशियाँ जैसे उभरकर
उनकी आखों में छा जाती हैं ,
अगर कभी हो शिकायत हमसे कोई
तो बड़े प्यार से हर बात समझाया हैं
कोशिश की हैं आज थोड़ी सी हिम्मत जुटाई हैं
हाॅ आज मैंने अपनी प्यारी कलम
अपने प्यारे पापा के नाम पर चलाई हैं !
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काफी अरसा बीत गया
काफी अरसा बीत गया
जाने अब तुम कैसे होंगे
वक़्त की सारी कड़वी बाते
अकेले याद कर रोते होगे
अब भीगी बारिश में
बिन छतरी के चलते होंगे
मुझसे बिछड़े अरसों हो गए
अब जानें किससे लड़ते होंगे
अच्छा होता जो साथ ही रहते
शायद अब तुम ये सोचते होगे
अपनें दिल की सारी बातें
खुद से खुद ही कहते होगे
काफी अरसा बीत गया
जाने अब तुम कैसे होगे ।।
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तू मेरे लिए सब से खास हैं
तू मेरे लिए सब से खास हैं
एक प्यारा सा एहसास हैं
नही हैं तू संग मेरे , फिर भी
मुझे हर पल तेरा एहसास हैं
तुम एक सपने की तरह हो
फिर भी मुझे अपने से लगते हो
तुझसे जुड़ी हर बातो का हैं एहसास मुझे
तुम मुझे राह की रोशनी से लगते हो
इस बात की खबर नहीं तुम्हे
पर मुझे पल पल का एहसास हैं
तू मेरे लिए सब से खास हैं !
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By : Pritee Sahu
Hope u like it ☺️☺️
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1 Comments
Beautiful lines
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