मेरे प्यार से तुझे इतना ऐतराज़ क्यों हैं,,
एक तरफा ही तो है तो तू परेशान क्यों हैं,,
इज़हार इश्क़ का किया नहीं मैंने कभी,,
दुनिया की बातो पर फिर ऐतबार क्यों है,,
आऊंगी राहों में तेरी कभी सोचना भी नहीं,,
दिल लगा ले, कहीं मुझ सा मिलेगा भी नहीं,,
इंतज़ार तेरा करते रहना तो हक है मेरा,,
फ़िक्र ना कर दुआओं में भी तुझे कभी मागूंगी नहीं..!!
खोई हूं खुद को खुद में बहुत,,
थोड़ा सा तुझको पाने के लिए,,
इतने भी बेरहम ना बनो यार मेरे,,
सिर्फ खुद को बहलाने के लिए..!!
© Subi Gupta
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