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Intezaar ( Part - 2 ) -- Tanvi Patel ( Tanu )

 


अचानक से
बेटा रेडी हुई की नही तुम...?
भाई कब से रेडी हो गया है
चल जल्दी कर वो  तुझे बस स्टैंड तक छोड़ देता है...

बस मां,,
2 मिनिट
हल्की सी काजल लगा दू  मैं...

उसको मेरी आंख से ज्यादा उस आंख में बसी उसकी तस्वीर से प्रेम था...
जब भी मुझसे मिलता ...
उसके दोनो हाथ से मेरी कमर कस के पकड़ कर उसकी गोद में बिठा देता और मैं उसके और करीब आ जाती. 

मैं मना करती रहती थी,,,

छोड़ो ना यार !
कोई देख लेगा ,,,
ऐसे खुल्लेआम गोद में कोन बिठाता है...
क्या सोचेगा कोई ¿

जिसको जो सोचना है सोचने दो 
मेरी Problem नहीं है वो 
and seriously I don't Care...
बस मुझे मेरी स्वीटहार्ट अपने गोदी में चाहिए मतलब चाहिए...))

इतना करीब ले आता था की
सास छोड़ने तक का भी अंतर नही बचता था... :)
मेरे दोनो हाथ उसके गालों पर चले जाते और उसके गाल को थोड़ा सा खींच लेती ....
वो फिर से झटका मार के अपनी ओर करीब कर लेता जिससे मैं उसकी पकड़ से खुद को छुड़ा न पाऊं....
इतना नजदीक और बारीकी से किसकी मासूमियत को नहीं देखा था मैने...
उसके बात करने के अंदाज से  उसकी आंखो में आंख डाल कर बात करना बड़ा प्यारा लगता था मुझे और तब उसकी प्यारी सी बियर्ड वाली तस्वीर मेरी आंखो की फ्रेम में अपने आप कैद हो जाती थी...
वैसे उसने कभी नहीं बोला की तुम आईलाइनर लगाओ या काजल लगा के मुझसे मिलने आओ....
बस हमेशा यही बोलता जब भी मिलने आओ...

मुझे मेरा नटखट बच्चा चाहिएं सामने ,,,,
क्योंकि मुझे  उसकी continuos चपड चपड़ बाते  सुनना  अच्छा लगता है...
मुझे उसके फेस के cute से मूंह बनाने वाले expression को देखना और भी ज्यादा पसंद है.....
बार बार उसके चहरे को परेशान कर रहे बालों को कान के पीछे करना और फिर  वापस सारे बाल खुल्ले कर के हाथ से कंगी कर तेरा यूं जुड़ा बना लेना :/
तुम नहीं जानती की 
कितना पसंद है मुझे ये तेरी छोटी छोटी बाते नोटिस करना ~

.

पता नही क्यूं आज मैं इतनी मुस्कुरा रही थी...
अंदर ही अंदर से अजीब सी फीलिंग आ रही थी,,,,
शायद मेरे मौसी बनने की खुशी से ज्यादा मुझे कल वाले सपने को सच होता हुआ देखनी की तलब ज्यादा थी...

ड्रॉअर मैं से मेने एक व्हाइट एंड गोल्डन कलर की वॉच निकाली  और फटाक से पहन ली... :)
जो उसे मेरे कलाई में बहुत अच्छी लगती थी...
जल्दी जल्दी में कंगी करना भूल गई 
क्योंकि मेरे बाल लंबे होने की वज़ह से थोड़े बहुत अभी भी गीले हो रखे थे...
फटाक से मेरी दाएं हाथ की उंगलियों से ही कंगी कर के जुड़ा बना दिया...
और दोनो साइड से पतली सी बाल की एक एक लट्ट निकाल दी :)

अब में बिल्कुल रेडी थी...

कहा है मां आपका लाड़ला ...
ओ भाई !!
where r u ?
चलो जल्दी ... I'm ready now !!


भाई ने बाइक स्टार्ट की और
उसने बस स्टैंड तक मुझे छोड़ दिया...
इतने में  मेरी बस भी आ गई ....
.
वैसे ट्रेवलिंग करते वक्त  में सोंग्स कम और अपनी लिखी हुई डायरी में उलझना ज्यादा पसंद करती हूं....
लेकिन कोई भी सफर की शुरुआत उसके फेवरेट सॉन्ग से ही करती थी...

"तू ही मेरी है
सारी ज़मीन
चाहे कहीं से चलूं
तुझपे ही आके रुकु
तेरे सिवा
मैं जाऊँ कहाँ
कोई भी राह चुनूं
तुझपे ही आके रुकु

तुम मिले
तो लम्हे थम गये,
तुम मिले
तो सारे गम गये,
तुम मिले
तो मुस्कुराना आ गया
तुम मिले
तो जादू छा गया,
तुम मिले
तो जीना आ गया,
तुम मिले
तो मैने पाया है खुदा"

ये सिर्फ लिरिक्स नही थे मेरे लिए,,,,
लेकिन ये वो ख़ूबसूरत अल्फाज़  थे जो उसने एक वक्त मेरे लिए अपनी आवाज में गुनगुनाए थे....

वैसे उस दिन window seat मिल गया था 
तो बार बार रोड पर दौड़ रहे पैड़ को देखती रहती थी... फिर वापस बीते दिनों की यादों में गुम हो जाती थी ,,,,,
window में से आ रही ठंडी पवन और खुशनुमा वातावरण की वजह से मेरी आंख कब लग गई पता नही चला....

अचानक से मेरे फोन की रिंग बजी....
( generally तो मेरा फोन साइलेंट ही रहता है और I know ये बहुत bad habit है पर सच बोलूं तो फोन साइलेंट की वज़ह से कभी किसके फोन नही उठा पाती थी तो दोस्तो से रोज गालियां खाती थी..🤪..  पर पता नही उस दिन मेरा फोन जनरल मोड पर था )

रींग बजे जा रही थी....

"Kiss Me
Close Your Eyes
Miss Me

I Can Wet Your Lips
On Your Fingertip
And Happiness In Your Eyes
Kiss Me
Close Your Eyes
Miss Me
Close Your Eyes
Kiss Me."
  
हा यही मेरी रिंगटोन थी जो सिर्फ मैंने उसके लिए रखी थी ।
(क्योंकी मुझे कैडबरी वाला एड तब कुछ ज्यादा ही पसंद था न....)

वैसे एक बात बताऊं सीक्रेट...
हम दोनो हमेशा से फोन में same ही rigtone रखा करते थे.... :)


मुझे विंडो में से आ रही धूप की वजह से स्क्रीन पर लिखे नंबर या नाम का पता नहीं चल पा रहा था की किसकी कॉल है...

जैसे तैसे कर brightness increase किया
और नंबर देख कर थोड़ी सी सहम गई....


to be continued in the next part...


Intezaar ( Part - 1 )  -- Tanvi Patel ( Tanu )


Intezaar -- A Story By : Tanvi Patel ( Tanu )


Thanks...

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