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Intezaar ( Part - 1 ) -- Tanvi Patel ( Tanu )


करीब दो साल पहले की ही बात है जब मैं किसी काम से हजरतगंज के लिए रवाना हो रही थी.... रात को सब समान almost पेक कर ही लिया था मैने और सुबह की बस से मुझे मेरे दी के घर उनके घर आए नए मेहमान की मुंह दिखाई के लिए जाना था. रात को अपने बिस्तर पर लेटे लेटे मेरे विंडो में से आ रही हल्की सी चांद की रोशनी को महसूस कर रही थी और पता नहीं क्यूं में उस चांद को देख कर मुस्कुराए जा रही थी और  यूंही हसते हंसते मैं अपनी अतीत की यादों में गुम हो गई...


वैसे अकेली सोती हूं  में अपनी रूम में🌃

चांद 🌙 घूमता घूमता हमेशा मेरी विंडो में करीब ११:३० बजे दस्तक देता था

मैं भी उस चांद के आने के इंतज़ार में विंडो के पड़दो को पहले से ही हटा दिया करती थी 

और चांद की  हल्की सी रोशनी सीधा मेरे चहरे पर आ जाती थी

मेरा ये रोज का सिलसिला था.

ये वक्त मेरा फिक्स रहता था चांद से थोड़ी यूंही २ मिनिट गुफ्तगू करते करते सो जाने का...

वैसे चांद भी बहुत नटखट था  

हां !🙈

मेरे जैसे ही...


(नटखट शब्द मेरे दिल के बहुत करीब था ... शायद इसीलिए मैं दिन में 50 बार से ज्यादा बात बात पर उसे यूज किया करती थी)


चांद कभी बादलों के पीछे छुप जाता तो कभी अचानक से बादल के सामने आके होले से उसको छू कर निकल जाता था...

पता नही क्यूं मुझे वो चांद को देख कर बार बार महसूस हो रहा था

की कल शायद दिन में  मेरे किसी अपने से मुलाक़ात होने वाली है...

अतीत के पलो को याद करते करते  कब मेरी आंख लग गई पता ही नही चला....


सुबह ! ☀️

उठ जल्दी से  बेटा !

कब से अलार्म बज रहा है तेरा....

6 बजने में 25 मिनिट ही बाकी है ...

तुझे  जाना नही है क्या अपनी दीदी के वहा...?


थोड़ा सा आलस कर के....

बस मां 1 मिनट दे दो...

5 मिनट यूंही बिस्तर पर लेटी रही...

अचानक से..)

फोन में वक्त देखा ...

थोड़ा मुस्कुरा कर ....

फटाक से उठ कर रेडी हो गई....


हां आज मैने वो ही उसके पसंद का TShirt पहना था...

मुझे नहीं पता क्यों पहना था...

पर वो स्पेशल tshirt मैं अपने एक स्पेशल वन के लिए ही पहनती थी...

और आज स्ट्रॉन्ग फीलिंग आ रही थी की शायद हम टकराने वाले है कहीं...:)

.

Dmart का vanila softey 🍦हमेशा से मेरे मूड को और ज्यादा रोमेंटिक बनाता था....

और ये बात वो अच्छी तरह से जानता था..

इसीलिए तो 

जब पहली बार उसको मिलने गई थी..

तब वो मुझे  DMart की वो स्पेशल वनीला softey (आइसक्रीम)खाने ले गया था...

आज भी मुझे याद है की 

मैं उसको अपने पीछे बैठा कर अपने विहीकल से उसे लॉन्ग ड्राइव पर ले गई थी...

उसको पता था ice cream मुझे मेरे दोनो हाथो में चाहिए थी क्योंकि ice cream मेरा पहला प्यार था...🤪

🙈

हां मतलब दोनो हाथो में एक एक सॉफ्टी के कोन...

में एक बार राइट वाले हैंड से तो दूसरी बार लेफ्ट वाले हैंड से  बिना उसके सामने देखे फटाफट से खा रही थी जिससे वो मेल्ट न हो जाय...

और उसने तो आइसक्रीम लिया ही नही था  क्योंकि वो भाईसाहब तो मेरे

सॉफ्टी कोन को नजर लगाए बैठे थे...


बीच बीच में मेरे हाथ से खीच कर खा लेता फिर बोलता

हाय ...जब ख़ूबसूरत लड़की मेरी हो और  ऊपर से उसकी जूठी आइसक्रीम तो और भी ज्यादा स्वाद में मीठी लगती है...😍😍

और आपको पता ही होगा ice cream कोन खाते वक्त लिप्स के साइड छोटू सा मूछ बन जाता है...

पता नही कब उसने फटाक से पॉकेट में से फोन निकाला और मेरी ऐसे फेस वाली 2 फोटो खींच ली ...

फिर बोलता है की

सुन न....

कुछ दिखता हूं मैं तुम्हे

मेरी अभी ही खींची हुई फोटो निकाल कर बोलता है ऐसा लग रहा जैसे तुम बिचारे इस आइसक्रीम पर अत्याचार कर रही हो..


(साथ में मुस्कुराते हुए )


साथ में दोनो ने  प्यारा सा सेल्फी लिया .....


फिर सोचा

चलो फ्री में AC की ठंडी हवा खा के चलते है फिर...


हमे दोनो Dmart में घूम रहे थे ....


वो बोले चलो ना वूमेंस सेक्शन में जाते है कुछ देखते है अच्छा तेरे लिए...

पता नहीं कब उसने एक t-shirt खरीद लिया  और कब पेमेंट कर  उसने वो लेकर मेरे बैग में रख दिया ...!!!

🙈

वैसे ....

हल्का ऑरेंज कलर का था वो tshirt

पता है ...

वो बहुत यूनिक था

वैसे t-shirt branded नहीं था  लेकिन देने वाला मेरे दिल की जान था...💖

वो t-shirt के ऊपर के लिखी ब्लैक कलर की प्रिंटिंग वाले शब्द

मुझे उसकी लाइफ में मेरी importance को बार बार फील करवाते थे....


7 शब्द ही लिखे थे t-shirt के ऊपर लेकिन सात जनम उसकी यादों में जीने के लिए वो काफी था...😚


लिखा था...


" 𝙄  𝙙𝙞𝙙𝙣'𝙩 𝙘𝙝𝙤𝙤𝙨𝙚 𝙮𝙤𝙪 , 𝙢𝙮 𝙝𝙚𝙖𝙧𝙩 𝙙𝙞𝙙. " ❤️🙈


पता नही 3 मिनिट यूंही आयने में  देख कर वो प्रिंट के शब्दों के ऊपर मैं अपना हाथ घुमाए जा रही थी...

फील कर रही थी की जैसे उसने मुझे अपने गले से लगाया है

और मैं भी उसको इतना टाइट पकड़ लिया था जैसे थोड़ी सी ढील से वो मुझसे दूर चला जाने वाला हो...

मेरी एक बहुत बुरी हैबिट थी....

मुझे गले लगते वक्त मेरे पैर उसके पैर के ऊपर ही रखने अच्छे लगते थे...

मैं ज्यादा मोटी नहीं थी इसीलिए बेचारा हमेशा वो सहन कर लेता था मेरे weight को .....

 

   To be Continued : 


Intezaar ( Part - 2 )  -- Tanvi Patel ( Tanu )


Intezaar -- A Story By : Tanvi Patel ( Tanu )


Thanks...

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