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Shayari (Volume 1)- Deepali Mirekar

⋇⋆✦⋆⋇ अलविदा दीदी ⋇⋆✦⋆⋇ 

अमर आत्मा का अनंत सफ़र
दे गया अश्रु करोड़ों नयनों में,
वेदनाओं का यह पल
क्यू न थम जाएं यहीं पर।

ममत्व के आंचल में जिसने
समेटा था अपने अनुजो को,
क्यू उठ गया आज वह प्रेम का साया
क्यू हो गई दीदी मौन।

स्वरों की स्वर लहरी में
मंत्र मुग्ध हो जाते जन,
स्वर की सरस्वती हो गई है आज मौन
चिताकर रही है अपनों की पीड़ा
शोक के सन्नाटे में निशब्द है बोल।

हर एक मन की आवाज
स्तब्ध है धड़कन की हलचल,
भावनाओ का गहरा संबंध
क्यू टूट गया है दीदी का संग,
कैसा है यह नियति का नियम??

हे मां शारदे!
 क्यू आपकी प्यारी बेटी
वसंत पंचमी की पावन पर्व पर
हमसे अलविदा कह गई? 
कलयुग में सादगी और संस्कृति की छवि दीदी
क्यू महान स्वर साम्राज्ञी हमसे बिछड़ गई??

भारत रत्न से सम्मानित
भारत की थी शान ,
दीदी आप हो हमारे अभिमान,
पीढ़ी अंतराल को भेदती आपकी वाणी
संगम होता संवेदनाओ का 
मिलती भावों की डोर भावों से
अनोखी थी आपकी सादगी।

व्यक्तित्व में सरल सौम्यता की छवि
माथे पर तिलक का टीका
होटों पर वह मीठी मुस्कान ,
ओढ़ के रखती थी अपना पल्लू
लगती थीं भारत मां की प्यारी बेटी,
चेहरे पर प्रभावी छवि थी
देखते ही पापी भी नतमस्तक हो जाएं
 व्यक्तित्व में थी दीदी आप एसी धनी।

Deepali D Mirekar vijayapura karantaka


⋇⋆✦⋆⋇ मां की परछाई बेटी ⋇⋆✦⋆⋇ 

नियति का अजीब ही खेल है
पिता के लिए बेटी मां है
अनकहा अनोखा यह रिश्ता
मां का कलिजा बेटी में समाया।

पिता के लिए बेटी मां की परछाई है
पिता की कलाई थामे
नन्ने नन्ने कदमों से चलना सिखती बेटी
न जानें कब इतनी बड़ी हो जाती है की
पिता की बनती मां
उसके सुख दुःख की साथी बनती
कभी कभी डॉट देती गलती पर
तो कभी समझदारी का पाठ पढ़ाती।

पिता के लिए बेटी मां की परछाई है
मातृत्व का प्रेम लुटाती
पिता की नादानियां संभालती
पिता का गर्व बनती
परिवार को बांधती खुशियों की डोरी से
हारे थके पिता की प्रेरणा बनती
लगता है पिता को 
है वह मेरी पत्नी की परछाई पर 
मेरे मां का पुनर्जन्म है ले आयी।

संघर्ष के संसार में
कोई न किसका अपना
मां पिता बिन उजड़ा जीवन
सवारा है बेटी ने बिखरा हुवा मन।

बेटी मेरी मां की परछाई
बनाती जीवन को
स्वर्ग सा सुंदर
बेटी कहकर उसको मार न देना
अपने ही मां का गला न घोटना
क्यू बने इंसान 
बेटी के नाम पर मां का हत्यारा
आंखें खोल कर देखते तो सही
बेटी होती अपने मां की परछाई।

मेरी बेटी मेरी मां 
स्वर्ग से सुंदर मेरा संसार।

©Deepali Mirekar karantaka


⋇⋆✦⋆⋇ रिश्ते ⋇⋆✦⋆⋇ 

रिश्ते तब दिल से जुड़े थे
हिचकी में भी अपनों के आने की आहट थी
आज इंसान ही यंत्र बन गए है
साथ रहते हुवे भी एक दूजे से अनजान
रिश्तों में भावनाओ का न कही नमो निशान।

Deepali...... 

©Deepali Mirekar

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