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कविताएं (Volume 6)- Lopamudra Pal

⋇⋆✦⋆⋇ 💖ये हुस्न तेरा ये इश्क़ मेरा💖 ⋇⋆✦⋆⋇ 

 कयामत अब ढाने चली ये हुस्न तेरा ये इश्क मेरा,
वदगुमान दिल तुझसे ही बस मोहब्बत करने चला।

बेमिसाल किस्सा सुनाए ये हुस्न तेरा ये इश्क़ मेरा,
महकते हुए ख्वाबों को हकीकत में काफिला मिला।

कुरबत के नाम लिखा है ये हुस्न तेरा ये इश्क़ मेरा,
शाम रंगीन दिल खुश नसीबी का सपने अब बुन चला।

अनमोल नगमों से सजी ये हुस्न तेरा ये इश्क मेरा,
बज़्म-ए-महफ़िल में दिल तेरे ही नगमा सुनाता चला।

हमारी दास्तान लिख रहा ये हुस्न तेरा ये इश्क मेरा,
दो जिस्म एक जान होके ये काफिला आगे बढ़ते चला।

#lopathewriter


⋇⋆✦⋆⋇ क्या पता ⋇⋆✦⋆⋇ 

 शांत सुधार जिंदगी, अब नया मोड़ ले रहा है,
क्या पता, यह दिल अब कौन सा किस्सा बनाने चला है।
टुकड़ों में बटी थी जो जिंदगी, अब थोड़ा-थोड़ा करके समेट रहा है,
क्या पता क्या यह दिल अब, कौन सा इतिहास रचने चला है।

बवंडर था कभी तो शांत चांदनी रात कभी हुआ करती थी,
जिंदगी के कई रंग अपनी आधी उम्र में देखा है,
क्या पता, यह दिल अब कौन सा चांद को आईना दिखाने चला है।
भूरी आंखों की गहराई में डूब ना जिनको मंजूर नहीं अब,
वह कौन से गले का रुख कर रहा है,
क्या पता क्यों यह दिल अब कौन सा मकान ढूंढने चला है।

उतार-चढ़ाव में मोलभाव का नापतोल अब और बेहतर होने लगा है,
क्या पता कहां यह दिल अब अपना वजूद ढूंढने चला है।
हर रोज नए रंग से भरी दुनिया में आंखें खुलती है अब,
जिंदगी कभी खुशनुमा तो कभी मायूस हो चला है।

क्या पता यह दिल अब किताब का कौन सा पन्ने में खुद को लिख रहा है,
काश कोई इसको पढ़ ले, 
क्या पता यह दिल उस राहगीर का तलाश करने चला है।
क्या पता यह दिल उस राह पर राहगीर का तलाश करने चला है। 

#lopathewriter


⋇⋆✦⋆⋇ तुम क्या हो...... ⋇⋆✦⋆⋇ 

 अंधेरी इन गलियारों में,
टिमटिमाती रोशनी के साथ जगमगाते हो,
अकेली पड़ी ख़्वाब में,
कुछ टूटे हुए एहसासों को सहलाते हो।
⚜️⚜️⚜️
खाली सी एक मकान में,
सुबह की धूप की तरह रोशनी भरते हो,
दिल की सुनी गलियों में,
तुम एक सरफिरा इश्क़ की तरह घूमते हो।
⚜️⚜️⚜️
मेरे वजूद के हिस्से में,
अंतरात्मा की गुँज का एहसास बनते हो,
मेरे अतीत के किस्से में,
टूटे हुए आबोदाना का दीवार से लगते हो।
⚜️⚜️⚜️
मेरे किताब के पन्ने में,
लफ्ज़ों के मोतियां पिरोए तुम सजते हो,
उन लफ़्ज़ों के लहजे में,
अल्फाज़ों के हुस्न-ए-आईना से लगते हो।
⚜️⚜️⚜️
दिल की सूखी जमीन में,
प्यार बेशुमार बरसाने की कसम खाते हो,
इश्क़ की उन वादियों में,
एक आवारा आशिक़ सा दिन गुजारते हो। 

#lopathewriter


⋇⋆✦⋆⋇ सपनों का घर ⋇⋆✦⋆⋇ 

हमेशा से ही एक सपना है ऐसे सपनों के घर का,
जहां प्यार ही प्यार आधार हो, हर एक मन का।
स्नेह प्रेम, आदर सत्कार से बंधी हर एक डोर हो,
घर का मान सम्मान पर सबके मन में जोर हो।

प्यार से सिंचित हो हमेशा हर एक मन आंगन,
मुस्कुराहट सबके होठों पर हां बड़े ही मनभावन।
रूठना मनाना थोड़ी सी छेड़खानी, भी जरूरी है,
प्यार तकरार के बिना यह घर संसार भी अधूरी है।

बड़ों का सम्मान करें, छोटों को बेहद प्यार दें,
अपमान ना किसी का हो, उस पर हमेशा ध्यान दें।
हंसी खुशी से हर पल बीते, चैन अमन हो साथ में,
बच्चों की किलकारियों के साथ, खुशी गूंजे आंगन में।

भेदभाव ना हो कभी भी, पुरुष और नारी का वहां,
कंधे से कंधा मिलाकर बनाएं अपना एक नया जहां।
प्रभु की आशीष से महके वो सपनों का संसार सदा,
रिश्ते की बुनियाद का मूल्य हर एक व्यक्ति करें अदा।

ऐसा हो मेरा सपनों का घर, बाहर छाए रहे सदा,
रिश्तों की गहराई समझे, संग रहे एक दूजे के सर्वदा।
मांग है भगवान से यही, मिले मुझे ऐसे सपनों का घर,
सपनों में खोया रहे दिल, अच्छे से हो जीवन का बसर।

#lopathewriter


⋇⋆✦⋆⋇ ❤️इश्क़ की तलाश ❤️ ⋇⋆✦⋆⋇ 

इश्क़-ए-अंजुमन में बहक रहा है दिल इस कदर,
खोज रही है किस हूर की करने दीदार-ए-नज़र।
इश्क़ की खोज में हम घूम रहे हैं कब से दरबदर,
किसी का न साथ मिला ख़ाली है दिल की नगर।

दीदार-ए-यार को बेकरार यह दिल तरस रहा है,
ना जाने कौन डगर में, मेरा इश्क़ पनप रहा है। 
सूखी पड़ी है दिल की जमीन, प्यार का इंतजार है,
तलाशूँ उसे हर प्रहर, उस ख़्वाब से बेहद प्यार है।

ख़्वाबों में जन्नत-ए-महफ़िल हमने सजा लिया है,
इश्क़ की ख़ुशबू से सारा आलम महका दिया है।
कभी ना कभी तो बरसेंगे प्यार की बूंदे, यकीन है,
बस एक हमसफ़र की, इस मुसाफिर को तलाश है। 

#lopathewriter


⋇⋆✦⋆⋇ वो पहली मुलाक़ात ⋇⋆✦⋆⋇ 

हाँ, वह पहली मुलाक़ात,
जब अर्से बाद आई थी तुम्हारे सामने में,
या जिस दिन हम दोनों मिले थे अकेले में। 

मेरे लिए पहली मुलाकात वह ख़ास दिन था,
जब तुम और में मिले थे अकेले में,
जिसकी तैयारी तुमने तो खूब की थी,
पलकें बिछाए बैठे थे बस मेरे इंतजार में।  

सारे बंधनों के बांध तोड़ के,
आई थी उस दिन, तुमसे मिलने में,
तुम्हारे प्यार का कशिश ऐसा था कि,
खींच लिया मुझे तुम्हारे आगोश में।  

खोला था गाड़ी का दरवाजा तुमने,
मैं भी पलकें नीचे किए बैठ गई,
निहारने की थोड़ी सोची भी मन में,
पर नजरें तुम्हारे तरफ़ ना कर पाई।  

बहुत सलीके से मेरे पास आकर बैठना,
मेरे हाथों को वह प्यार से थामना,
बिन पलकें झपकाए मुझे देखते रहना,
मानो खो गया था जो बरसों पहले
आज हो रहा है उनका दोबारा मिलना।   

नजरें झुका कर बैठी थी मैं,
तुम्हें एक नज़र देखने की चाहत थी,
पर पलके उठाना मुश्किल हो गया था,
मानो, इश्क़ के समंदर में जैसे डूब गई थी।  

समय गवाह है हमारे प्यार का,
फिर से प्यार करने का मौका दिया हमको,
तुम्हारे आगोश में आकर में भूल गई खुद को।
मेरे गालों को तेरे हाथों से छूना ऐसे,
मानो दिल की सारे रंजिश कहीं खो गए जैसे।

काश वो पल वहीं पर ठहर जाता,
तुम्हारे आगोश में यह जिंदगी बीत पाता।
बेहद खुशनुमा सा था वह पल, जब तुमने मुझे,
बड़े प्यार से तुम्हारे और जोर से खींच लिया था,
मानो जैसे वापसी का मुझे तोहफा दिया था। 

वह पहली मुलाक़ात,
वह दिल के जज़्बात,
आज भी उमड़ते हैं दिल में,
जब भी याद करती हूँ तुम्हें मैं।   

#lopathewriter 


⋇⋆✦⋆⋇  🙏पितृपक्ष 🙏 ⋇⋆✦⋆⋇ 

प्रिय पिता पितरों के करें हम सदा आदर सत्कार।
चाहे वह जीवित हो या हो वह मरणोपरांत विचार।।

सारे तीन ऋणों से मुक्ति करे, यह धर्म ग्रंथ अनुसार।
पितृ ऋण है सर्वोपरि, पितृपक्ष में होता इसका उपचार।।

गाय काक को भोजन दें, चलो करें पितरों के उद्धार।
ब्रह्मांड की ऊर्जा का जब हो पृथ्वी मंडल पर भार।।

तिल मिश्रित जल और तीन-तीन अंजलियाँ दे परिवार।
जन्म से तर्पण के दिन तक के हो पाप नाश, मिले छुटकार।।

पितृपक्ष में तर्पण करो सारे उचित विधि के अनुसार।
पितृदोष कटे हो आत्मा शांति खुश हो तब घर संसार।।

आत्मा तृप्ति हो उनका जो कर गए हैं संसार पार।
सदा रहे वो प्रेत काल में मन में लिए शांति अपार।।

पुराण में कर्ण पुनर्जन्म लेकर आया है कथासार।
निर्धन ब्राह्मणों को दान दिए पितृपक्ष का हो उद्धार।।

चाहे जाओ विष्णुपद मंदिर या जाओ तुम गया धार ।
पितृपक्ष दान महापुण्य, करना जग में इसका प्रचार।।

रक्षक ना बने भक्षक, सारे वंश की वृद्धि हो इसका सार।
आशीष मिले गुरुजनों का, मन में भरो तुम आशा अपार।।

तर्पण कर पितृपक्ष में, श्राद्ध में रखो अपनी भक्तिसार।
परिवार में सुख शांति भरदें पितर, तृप्त हो जीवन संसार।। 

#lopathewriter 
#पितृपक्ष


©Lopamudra Pal

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