Dr. (Mrs)Aartee Dubey
डॉं आरती दुबे
परिचय
शिक्षा-
• पीएचडी: अथर्ववैदिक वाङ्गमय में मानव संसाधन प्रबंधन के मूल तत्व
• एमए - संस्कृत (गोल्ड मेडलिस्ट)
• एमकॉम
• बीएड
संप्रति-
• हिंदी एवं संस्कृत अध्यापन। (शिक्षण की विशिष्ट शैली के लिए केंद्रीय मंत्री मा. स्मृति ईरानी जी द्वारा सम्मानित)
• ध्यान योग प्रशिक्षिका
• प्रमुख संपादक - धरा क्रांति पत्रिका
- अंशकालिक पत्रकार
•स्टूडेन्ट्स काउन्सिलर
सम्मान -
• भारत सरकार मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा शिक्षण सम्मान
• देवी अहिल्या विश्वविद्यालय संस्कृत स्नातकोत्तर - स्वर्ण पदक
• सर्वश्रेष्ठ साहित्य सम्मान - राष्ट्रीय क़लमकार मंच
• सामयिक लेखन पुरस्कार - हिंदी विकास मंच
• नेशन बिल्डर सम्मान - इंडिया लिटरेसी मिशन
• अखिल भारतीय संस्कृत भाषा प्रसार समिति सम्मान
•विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान - दैनिक भास्कर
•हिन्दी दिवस शिक्षक सम्मान - पत्रिका समूह
हिंदी भाषा के प्रति रुचि जागृत करने, वैदिक ज्ञान को सहज बनाने और विद्यार्थियों में व्यक्तित्व विकास अभिप्रेरण के लिए विभिन्न स्तरों और मंचों पर प्रशंसित एवं सम्मानित
गतिविधियाँ
• शोधपत्र वाचन - १. शून्यतव से पूर्णत्व, २. वाणिज्य के नवल आयाम
• कार्यशाला एवं सेमिनार -
हिन्दी एवं संस्कृत भाषा में शिक्षण युक्ति कार्यशाला,सेमीनार एवं वेबीनार के द्वारा शिक्षक प्रशिक्षण।
विद्यार्थियों एवं महिलाओं के लिए ध्यान योग प्रशिक्षण एवं शिविर आयोजन।
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-स्टूडेन्ट्स काउन्सिलिंग, व्यक्तित्व विकास कक्षा एवं शिविर आयोजन, हिंदी भाषा प्रचार (मध्य भारत हिन्दी साहित्य समिति)
• प्रकाशन- विविध आलेख,कविताएं, नुक्कड़ नाटक एवं कविता का साझा संकलन ,एवं शोध आलेख का प्रकाशन।
डॉ आरती दुबे - 9893456277
इन्दौर, मध्य प्रदेश
डॉं आरती दुबे द्वारा IQ हिंदी दिवस पर प्रस्तुत एक रचना
*सँवर रहा है अपना भारत*
कोटि-कोटि कंठो से अविरल आज यही स्वरधारा मुखरित
*सँवर रहा है अपना भारत*
वेद भूमि , तकनीकि ख्याता
ज्योतिष शून्य दशमलव दाता
सृष्टि की प्राचीन सभ्यता परिसज्जित हो आज भी जीवित
*सँवर रहा है अपना भारत*
दक्ष युवा अब करें गर्जना,
विश्वकुटुम्ब की करें सर्जना
संस्कृत सी वैज्ञानिक भाषा के दाता अब हुए विशारद।
*सँवर रहा है अपना भारत*
सद्साहित्य का पावन सरजन
सद्विचार अनुपम सद्दर्शन
हिन्दी की गरिमा द्विगुणित हो,सद्नीती फिर हो संचारित।
*सँवर रहा है अपना भारत*
केन्द्र कला के, उत्सव सारे
गहने मानवता के न्यारे
मेल मिलाप की रची रंगोली, सौधी, साझा संस्कृति सुकृत
*सँवर रहा है अपना भारत*
मौलिक व स्वरचित
डॉ आरती दुबे
इन्दौर
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