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कविता (Volume 1)-- Astha Singh


⋇⋆✦⋇ hindiKaAstitva ⋇⋆✦⋆⋇

ऐ हिंदी भाषा!
तेरे देश में ही तुझको कष्ट हो रहा है,
हिन्द से हिंदी अस्तित्व नष्ट हो रहा है ।

चाहे व्यक्ति कितना भी हो तुझमें सक्षम,
अंग्रेजी ज्ञान बिना अशिक्षित माना जाता है,
बड़े सभाओं- गोष्ठियों में तिरस्कृत जाना जाता है
पश्चिम में तेरी वरीयता ही नहीं,
तो उत्तर में भी जटिल है कमी,
पूरब पर तेरे कुछ अवशेष रक्षक हैं,
दक्षिण में तेरे पदचिन्ह तक नहीं,
तुझको कार्यालयों में मात्र विकल्प बनाकर,
आज सरकार को हर्ष हो रहा है,
हिन्द से हिंदी का अस्तिव नष्ट हो रहा है...


आज लोग यहाँ के सांस्कृतिक धरोहर खो रहे हैं
अपनी भूमि में विदेशी भाषाओं के बीज बो रहे हैं
मातृभाषा यहां तू है मगर,
फिरंगी बोल फल फूल रहे हैं,
औरों जैसे बनने की चाह में,
हम अपना मूल भूल रहे हैं,
हिंदी के साम्राज्य में आज अंग्रेजी का वर्चस्व हो रहा है,
हिन्द से हिंदी का अस्तित्व नष्ट हो रहा है...

इतनी उपेक्षा क्यूँ आज हमारी हिंदी से?
ये संकोछ क्यूँ अपनी पहचान से, विरासत से?
ये जो तेरी अनिवार्यता में अभाव है
अंग्रेजों के अनुयाईयों के उपहार हैं
अपनी संस्कृति से अनभिज्ञ होना अदम्य परित्याग है,
हिन्द में हिन्दी से वंचित रहना हमारा सबसे बड़ा दुर्भाग्य है,
हिमालय के कवच में बेहिचक,
आज यहां स्वदेशी भाषा उन्मूलन का दंश हो रहा है,
हिन्द से हिन्दी का अस्तित्व नष्ट हो रहा है...

ज़रा सी कोशिश अगर की जाये,
हिन्दी को कर्णधार बनाया जाये,
हम सब अगर अपनी हिन्दी को सुदृढ़ बनाएंगे,
हिन्दी के शब्दकोश विस्तृत और व्यवस्थित हो जायेंगे
मेरा तन मन धन मेरी पहचान है हिन्दी,
सारी भाषाओं को प्रस्फुटित करने वाली,
हर भारतीय का स्वाभिमान है हिन्दी ।

⋇⋆✦⋇ सैनिक और उसकी मां ⋇⋆✦⋆⋇

"ख़त में क्या लिखा तुमने"......."बेटा"
अगले खत का जवाब ना दे पाऊंगा मां,
घर तो आऊंगा लेकिन बोल ना पाऊंगा मां।
गले तो आप फिर भी लगाकर रोयेगी पर,
में उन आशों को पोंछ ना पाऊंगा मां।
मन तो करेगा की में आपके आंचल में सोऊ पर,
वो लिपटा तिरंगा हटा ना पाऊंगा मां।
मेरे लूह का रंग इतना पक्का ना होगा,
जब धुलेगा का तिरंगा आपके आशुओं से मां।
सर तो ऊंचा किया बाबा का,
कंधे का बोझ बढ़ा दिया अपनी अर्थी से ना।
ख़त तो लिखा है फिर भी आपके नाम का,
पर उसे भेज ना पाऊंगा मां।।

मां अपने शहीद बेटे से,,
कल ही तो चिट्ठी आयी थी,
मां में जल्दी घर आऊंगा।
बाबा के लिए लाऊंगा का लाठी,
बोल तेरे लिए क्या लाऊंगा।
बन बड़े भाई की रीढ़ की हड्डी,
उसके कंधे से कंधा मिलाऊंगा।
छोटे के लिए लाऊंगा खिलौने,
बोल तेरे लिए क्या लाऊंगा।
मां अबके जो में लौट आऊंगा,
तो वापस कभी ना जाऊंगा।
या आऊंगा मां ख़ुद के पैरों पर,
या सीने से तिरंगा लिपटा आऊंगा।
बेटा तू ने ये क्या किया,
अब कैसे रहेंगे तेरे बिना।।
******


©Astha Singh 

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