विषय - स्वतंत्रता दिवस
( हिंदी उत्थान )
दिवस ये स्वतंत्रता का अमर जवानों के बलिदानों की गाथा है,
देश हित में प्राण त्याग देना भारत भूमि की अमर ये प्रथा है,
गौरव से लहराता ये तिरंगा कहानी शूरवीरों के बलिदान की बताता है
रंग ये केसरिया भारत के रक्त रंजीत इतिहास की कहानी सुनाता है,
कितनी लाली मिटी होंगी मांगों की,आंचल माओं का भी भीगा होगा,
बहनों के राखी भी रोती होगी , कंधा पिता और भाई का भी तो रोया होगा,
जल्दी आऊंगा लौट के कहने वाला नन्हें फूलों से जब मिला ना होगा लौट के
क्या बीती होगी उन मासूमों पे जब तिरंगे में लिपटे पिता ने देखा ना होगा पलट के,
कोई फांसी चढ़ा हंसते-हंसते ,किसी ने देश पे हंसते-हंसते सबकुछ वार दिया,
वीरगति को प्राप्त होते नहीं वीर अकेले उनके परिवार ने भी खुद को देशहित में न्योछावर किया,
स्वतंत्र हैं हम सब आज बलिदान उन वीरों का भूल के भारत मां के सपूतों का यूं अपमान ना करना,
एक दीप शहीदों के नाम जलाना,अमर कुर्बानी से यूं ना तुम मुंह मोड़ना,
जो उपहार दिया है वीरों ने उस स्वतंत्रता के दीप को सदा ही जलाए रखना
देश को ले जाना प्रगति के मार्ग में तिरंगे के शान विश्व में बनाए रखना।
©Sujata Kumari
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