फरेबी
जाने तू और कितने रंग बदलेगा हर दिन बता अब
तू कितने रूप जहां को नए हर दिन ही दिखलायेगा
किसी रिश्ते की लाज रखी ना तूने किसे पता था कि
पिता के रूप में भी हैवानियत का ज़ाम छलकाएगा,
मजबूरी का नाम देके लुटाया खुद को तूने हरदम
नादानी नहीं तेरी सुनो वो तेरी कमजोरी थी
हिम्मत की बातें तुम जैसे ना करें तो बेहतर होगा
हिम्मत का नाम दिया जिसे तूने वो तेरी बुजदिली थी
खोखले समाज की बेड़ियों में कैद कर लोगे उड़ान मेरी
नींव ही जिसकी खोखली हो वो क्या मेरी बुनियाद हीलाएगा
दर्द की गलियों में पली हूं तेरे वार का होगा मुझपे असर नहीं
माना होगा विरोध मेरा तुझे हर कोई पलकों में ही बिठाएगा
बन्द दीवारों के अंधेरों से लड़ी हूं अकेली मैं जुगनू बनके
किसी का शम्मा बनके साथ ना चलना मुझे और ना तड़पाएगा
ख़ामोशी का कफ़न ओढ़ा के कब्र तक रूह को छोड़ आए हैं जो
अब न्याय की मंजिल में साथ उनका छोड़ जाना कब तक मुझे रुलायेगा
By - Sujata Kumari
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