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मेरी प्यरि माँ (Volume 1) - Gargi Gupta



⋇⋆✦⋆⋇ प्यारी माँ ⋇⋆✦⋆⋇

मेरी प्यारी माँ जिस दिन तुम्हें खोया था,
दिल और दिमाग तो दोनों खूब रोया था।

आँख पोछकर वापिस हम खडे़ हुए,
माँ तेरे सपनों के लिए हम वापिस खडे़ हुए।

माँ तेरी ममता मुझे हरपल बहुत मिली,
घर में छोटी होकर लाड़ दुलार खूब मिला।

तुझे कफन में मैने जरुर दफन होते देखा,
पर तेरे सपनों को मैने खुद में जीते हुए देखा।


⋇⋆✦⋆माँ ⋇⋆✦⋆⋇

शब्द नहीं, प्यार है माँ,
मेरे लिए तो यार है माँ।


अल्फ़ाज़ नहीं, जज्बात है माँ,
मेरे लिए तो ताकत है माँ।


जीवन नहीं, संसार है माँ,
मेरे लिए तो प्यार है माँ।


गम नहीं, खुशियाँ है माँ,
मेरे लिए तो दुआ है माँ।


रोती नहीं, हँसती है माँ,
मेरे लिए तो मुस्कुराती है माँ।


यादें नहीं, बातें है माँ
मेरे लिए तो रेडियो है माँ।


हाथ नहीं, साया है माँ
मेरे लिए तो माया है माँ।
*******

⋇⋆✦⋆⋇ मेरी माँ ⋇⋆✦⋆⋇

मेरी माँ मुझे तारों से देखती होगी,
जहाँ से मुझे दुआयें हजा़र देती होगी।

मेरी माँ मुझे बडे़ प्यार से निहारती होगी,
हर मौसम संग मुझे गले से लगाती होगी।

मेरी माँ दुनिया का सारा प्यार मुझ पर लुटाती है,
आसमाँ से नहीं तो तारों के बीच हरपल मुस्कुराती है।

मेरी बातों को हरपल झट से समझती होगी,
तभी मेरे बिन कहे सपनों में प्यार करती होगी।

महकता रहता है मेरा दामन माँ की वज़ह से,
जब भी बिखेरती हूँ खुशबू अपनी माँ जैसे।
**********



मुस्कुराकर हम सफर
 की दूरी तय करने लगे है,
अब हँसकर हम जीवन 
में अपने खुशियाँ लाने लगे है,
माँ जैसी बडी़-बडी़ बातें 
दिल से करने लगे है,
अनुभव से अब हम 
समझदार और होने लगे है,
झाँकते है निगाहों से 
दुनिया को हम सारी,
पर आखिर में निगाहे
 ढूँढती माँ को प्यारी 
******


⋇ छोटी-छोटी खशियों की चाभी मेरी प्यरि माँ ⋇


छोटी-छोटी खुशियों की चाभी मेरी प्यारी माँ 

          मेरा सारा संसार मेरी माँ से ही शुरु होता है और उनकी यादों के संग खत्म होता है।मुझे हर समय बस माँ का ही साथ चाहिए। सुबह सोकर उठूँ तो माँ का चेहरा देखूँ, सबसे पहले और रात में उनकी गोद में सर रखकर सो जाऊँ । उनका सुबह उठकर हम सबके लिए प्यार से हमारा मनपसंद नाश्ता बनाना, हमें प्यार से खिलाना, मेरे अटपटे सवालों का जवाब देना, यह सब हर घर के लिए छोटी बातें होंगी। पर मेरे लिए जीवन की यह छोटी-छोटी खुशियाँ है। फिर माँ के दिन के खाने की तैयारी करना और मेरा उनके कामों में हाथ बँटाना और उनका कहना तुम पढा़ई करो मैं सब कर लूँगी। यह सब मेरे लिए बहुत जरुरी था। ये छोटी-छोटी बातें मेरे जीवन को खुशहाल बना दिया। मैं भी इन सब बातों में मग्न हो गई। और यही मेरा संसार बनता चला गया।
पर अचानक एक रात मेरा संसार ही मुझसे बिछ़ड गया, मेरी माँ मुझसे हमेशा के लिए दूर चली गयी। एक ऐसी जगह जहाँ से कोई वापिस नहीं लौटा सकता था। भगवान ने माँ को मुझसे हमेशा के ले लिया। फिर क्या थी मेरे जीने का मन ही नहीं रहा दोबारा फिर भी आँख से आसू पोछकर अपने सपनों के लिए माँ के दिये वचनों के लिए हिम्मत जुटाकर खडी़ हो गई। क्योंकि अभी पापा और दीदी के लिए हरपल जीना था उनका ध्यान रख छोटी-छोटी खुशियों से माँ के बिना भी घर को महकाना था।


          जीवन में जिस दिन हम लोगों ने अपनी-अपनी माँ की कोख से जन्म लिया था वो पल माँ के लिए खुशियों से भरा हुआ होगा।
पहली बार गोद में जब हमें उठाया होगा बिना भेदभाव के लड़कों से ऊपर रख सीने से लगाया होगा। माँ क्यों करेगी अपने ही बच्चों में भेदभाव इसलिए जब घर में गूँजी होगी किलकारी तो बेटा क्या बेटी समझकर भी खूब दुलार से स्वागत और प्यार बरसाया होगा। छोटी-छोटी खुशियों को जीवन में माँ ने हरपल इसी तरह घर को संजोया होगा। बेटे की खुशबू से घर महका होगा तो बेटियों की गूँज से आँगन मुस्कुराया होगा। 

          खुशियाँ कहाँ भेदभाव, ऊँच नीच यह सब कहाँ जानती है यह तो बस माँ के जरिये घरों में अपना रास्ता बना लेती है। आजकल के हालातों को देखकर मुझे लगता है की खुशियाँ सबके जीवन से कहीं न कहीं खोती जा रही है जबकि इंसान ने एक बार भी यह न सोचा होगा की हम जब छोटे थे तो खुशियों के मायने कितने अलग थे। वो बचपन की दोस्ती वो बचपन की मस्ती और भी कितनी यादें है हमारी पुरानी जिसको हमने हरपल खूब जिया होगा क्या फ़िक्र क्या चिंता बस माँ के संग घर के आँगन में कितनी शरारतें की होंगी। मानती हूँ, की मैं आजकल जिम्मेदारियाँ और पैसों के लिए हर इंसान कहीं न कहीं मानसिक तनाव हो या कोई और भी परेशानी हो उससे हर दिन गुज़र रहा है पर वो क्यों नहीं सोचता एक बार पीछे मुड़कर की उसकी जिंदगी में कितनी खुशियाँ रही होंगी हरपल जो माँ-पापा के संग बिताये थे वो पल याद तो करो ज़रा फिर महसूस करो आँख बंद करके उस टाईम मशीन में पीछे जाकर देखो तो सही कितने सुहावने थे वो पल। खुशियों के कहाँ पैर होते है वो तो हर छोटी-छोटी बातों में भी महसूस की जा सकती है। जैसे देखा ही होगा की आजकल लोग दिखावे के लिए कितने पैसे खर्च कर देते है पर उसकी जग़ह एक बार उन गाँव में रहने वाले बच्चों को देखो तो सही की वो कितने कम संसाधनों में कितना कुछ बडा़ कर देते है जिसका अनुमान लगाना भी असंभव है पर उनसे प्रेरणा लेकर इस मानसिक तनाव की स्थिति में भी कैसे खुशियाँ अपने जीवन में हम हरपल भर सकते है। कहाँ उनके पास फोटो खिंचने के लिए मोबाइल होता है फिर भी वो अपनी सूझबूझ से छोटे से खिलौनों में ही खुश हो जाते है। 

          कोरोना काल में मैने एक बात जो अपने अनुभव से सीखी है की खुशियों को कभी यह मत समझो की जीवन में कम ही मिली है जबकि यह सोचो की भगवान ने हमें जितनी दी है उसके लिए हमें हरपल शुक्रिया करना चाहिए और दूसरों के जीवन में जिस भी प्रकार खुशियाँ दे सकें अक्सर हमें अपने जीवन में वो ही काम करने चाहिए। 
"जीवन की खुशियाँ हरपल माँ से ही मिलती है उनके संग बिताए हरपल याद करके मन को खुशियाँ मिलती है"
*********

⋇⋆✦⋆⋇ दुनिया की हर खुशी माँ तुझसे ही मिली है ⋇⋆✦⋆⋇


माँ दुनिया की हर खुशी मिली है,
मुझे तेरे लाने से तेरे जाने तक,
हर पल खुदा ने मेरा साथ निभाया है,
जब भी मन रोया है आँखे पोछकर 
कलम ने मुझे चुप कराया है,
शब्दों से ही पर हर खुशी गम का एहसास
मैने हर बार तेरा किया है,
कहाँ मिलता है आजकल इतना प्यार
वो मेरी कलम ने मुझे हर बार दिया है,
मन उदास हो या खुश हर बार तेरा संग
मुझे मेरी कलम में दिखा है माँ,
कुछ तारिख होती है ऐसी जो भूली नहीं जाती,
उस एक तारिख में है वो दिन बडा़ खास,
जिस दिन तुमने किया हो ममता का एहसास,
मैं खेलेगी होगी तुम्हारी प्यार भरी गोदी में,
रोई भी होगी हँसी भी होगी हर बार,
देख कर मेरा चेहरा निकला होगा,
यही तो है गोलू मोलू मेरा प्यार,
बाबा की गोदी में भी अपने स्नेह से खींचा था,
तब जाकर उनहोने मुझे गोदी लिया था,
पापा की लाडली बिटिया हूँ हर बार,
शैतानियों से करती हूँ आज भी बहुत परेशान,
मन को खुश करना आता है मुझे पापा,
जब करती हूँ बहुत सारी बकबक तब खुश,
हो जाते हो आप हर बार,
कोई सपना मेरा अधूरा रखा ही नहीं,
तभी तो कहती हूँ मुझे मिले माँ-पापा हर बार,
और करती रहूँ लाडली बिटिया बन नाक में दम हर बार,
क्योंकि इतनी चुलबुली और समझदार बिटिया मिलती है,
बडे़ नसीब से हर घर में एक बार।


⋇⋆✦⋆⋇ माँ बनने का ऐहसास ⋇⋆✦⋆⋇

माँ बनने का ऐहसास होता होगा कुछ खास
लिख दिया कलम से मैन आज

खिली होगी मेरे जीवन की कलियाँ तेरे अंगना माँ,
जब तू ने पहली बार मुझे गोद में उठाया होगा माँ।

जब तुम बनी होगी पहली दफा माँ वो पल खास रहा होगा माँ,
सब बातें और नौ महिने का दर्द भूलकर गोद में खिलाया होगा माँ।

अपनी जान से भी अधिक प्यार से गले लगाया होगा माँ,
सबके तानों को छोड़कर बस तेरा दिल मुस्कुराया होगा माँ।

मैं तो बस उस नौ महिने के दर्द को कलम में महसूस कर रही हूँ माँ,
जो तुमने मेरे लिए हर पल उस दर्द को महसूस कर लाई होगी मुझे माँ।

तुमको मिल गयी थी एक बेटी से बहू की पहचान इस घर माँ,
पर मेरे लिए पहला शब्द जब मुँह से निकला होगा तू मुस्कुराई होगी माँ।


©Gargi Gupta

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