काश !!
काश !! तुम दूर न होते । काश !! तुम करीब होते
तब महफिलों में ढूंढना नहीं पड़ता इस दिल को !
तुम महफिलों में संग होते ......... !!
काश !!
काश !! ये दिल आज भी याद करता उस पल को तो
काश !! ये आसमां आज भी झुक सकता ज़मीं पे तो
काश !! ये मोहब्बत ना दिखती मेरी आखों को तो
काश !! तुम समझ पाते मेरी जज़्बातों को तो
काश !!
काश !! दिल की धड़कन में तुम खुद को देख पाते एक दफा
काश !! मेरी ये खुबसूरती तेरी आखों में रहती हर दफा
पर अफ़सोस रहा तो बस इतना सा की
पत्थर जो छुपाया था मैंने दिल के किसी कोने में
उसे ढूंढा भी तो तूने, तोड़ने उन ख्वाबों के आशियाने को
जिसमें आइना थी मैं तेरी मोहब्बत की, अल्फाजों की
और टूट के बिखरे ही हैं हम कुछ इस कदर तो
काश !!
काश !! एक आंधी का झोंका आए और ये टूटे ख्वाब
सारे तेरे दरवाज़े पे ही दिख जाए
काश !! तेरे पांव इन बिखरे टुकड़ों पे पड़ जाए
काश !! इसकी चुभन तुझे मेरे टूटे दिल का एहसास कराए
काश !! तुम फिर से उन पुराने दिनों को याद कर जाओ
काश !! तुम एक दफा फिर से मुझे ही गलत ठहराओ
काश !! तुम फिर से मुझे तोड़ने को निकल जाओ
काश !! काश !! तुम मुझे फिर से रूला जाओ
By- Atika Singh
2 Comments
Nice 👍
ReplyDeleteNice lines 👌🏻💐
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