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कविताएं (Volume 3) - Mohan Lal Arora

⋇⋆✦⋆⋇🌹 💐 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 💐  🌹⋇⋆✦⋆⋇

गांधी जी हमारे विचारो मे गाँधी जी हमारे संस्कारो मे
खामोशी मे भी देखो गाँधी जी है ललकारो मे
गाँधी जी आपको है हमारा सलाम
पिता कर्म चंद गाँधी पुतली बाई माँ का नाम 
सत्य अहिंसा के तुम पुजारी अस्तेय और अपरिग्रह धारी
जन सेवा को अर्पित सदैव मातृभूमि को समर्पित 
लाठी की एक आहट से अंग्रेज भी थर्राया
बापू आपके आगे कोई भी ना टिक पाया
चरखा काता सुत काता कर्म को माना प्रधान
घर घर मे खादी को बनाया अपने देश की शान 
हिन्दुस्तान ही नहीं अफ्रिका मे भी डंका बजाया
काले गोरे का भेद मिटा कर नमक का अहसास दिलाया
राम राज्य के स्वप्नदृष्टा नवीन भारत के दुरदृष्टा
बुनियादी शिक्षा व्यवसायिक शिक्षा तुने ही लाई
स्वावलंबन पाठ की संस्कार तूने ही फैलाई
बापू तुझको वंदन है अभिनंदन है
तेरे आदर्शो को मोहन का शत शत नमन है

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा हरियाणा 
drmlarora7@gmail com

⋇⋆✦⋆⋇ 🌹 पितृ पक्ष  🌹  ⋇⋆✦⋆⋇

💐 पितृ पक्ष 💐 

पितृ पक्ष हैं आया 
पितृ पक्ष का सम्मान करे  
श्रद्धा से श्राद्ब करे
तृपन अर्पण के द्बारा हम
उन पितरो ध्यान करे
प्यार देकर जो हमे 
विदा हुए संसार से 
उनका आशीर्वाद लेकर 
उनको आज नमन करें
पितर चरण को नमन है 
ध्यान रखे हमारा दिन रात 
कृपा दृष्टि हम पर बनी रहे 
सिर पर हमेशा रहे हाथ
पुरखो मे आज शामिल हूऐ
जो कभी थे हमारे साथ 
आपके आशीर्वाद से 
फले फुले सारा परिवार 
कष्ट सब दुर हो
सुख सम्पति आए अपने द्वार 
आप हमारे है मन में 
आपके है हम बच्चे
याद हमेशा करते हैं 
हम मन के है सच्चे
पितृ पक्ष है आया 
पितरो का सम्मान करे
आओ सब नमन करे ,,। 

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा हरियाणा 
drmlarora7@gmail com

⋇⋆✦⋆⋇ 🌹 स्त्री चिंतन 🌹  ⋇⋆✦⋆⋇

💐 स्त्री चिंतन 💐 

स्त्री का अस्तित्व है महान
माँ बनना भी है सम्मान 
सब जगत पर है अहसान
कब हटेंगे यह इश्तहार बड़े अस्पतालों से 
यहाँ लिंग परीक्षण नहीं किया जाता सालो से 
पुत्र जन्म पर दी जाने वाली बधाईयाँ
बेटी जन्म पर मिलने वाली रूसवाईयाँ
कोई बात नहीं आजकल बेटा बेटी एक जैसे है 
यह कहना आसान परंतु मन से सब वैसे है 
फिर ना नोच कर फेंक दी जाए गटर मे कोई बच्ची 
जो नवरात्रो में पुजी गई थी देवी सच्ची 
दोहरी हुई पीठ पर बच्चा बाँध कर 
इंटो और सीमेंट को कंधे पर लाद कर 
चढती हुई गरीब औरत ना तौली जाए 
ठेकेदार की नजरो में ना बोली जाए 
फिर से ना किसी अबला पर गोली चलाई जाए 
ना तेजाब से राह चलती खुबसुरत शक्ल जलाई जाए 
नहीं कर सकते किसी स्त्री का सत्कार
बड़ा ही घिनौना और आपराधिक है बलात्कार 
घर से बाहर निकलने पर घुरती गंदी निगाहे 
बेचारी शर्म से सिमटती भरती ठंडी आहे
कब बंद होंगे कोठे और चकले 
क्यों बिकेंगी गोश्त की तरह सुंदर शक्ले
कब हटेंगी समाज से यह सब बुराईयाँ
कब दे पायेंगे हम अपनी बहन बेटियों को अच्छाईयाँ
कब बंद होंगा खरीद फरोख्त का व्यापार 
क्यों दिया जाए गाड़ी और सोने का हार 
क्यो दी जाए रुपये और रसूख की फाँस 
क्यो ढोये बाप बेचारा ज़िंदा जलाई लड़की की लाश 
हम सब समझे अपना धर्म और मान
करे हम सब हर बहन बेटी का सम्मान 

स्वरचित रचना
डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा
9896853750 


⋇⋆✦⋆⋇ मेरी बेटी मेरा अभिमान ⋇⋆✦⋆⋇

मै एक सरकारी हस्पताल मे फार्मासिस्ट की पोस्ट पर कार्यरत हूँ मेरा एक बेटा हुआ 5 साल बाद बेटी हुई, बेटी होने से घर मे रौनक ऐसे बढी की जैसे हमारे परिवार का कायाकल्प ही बदल गया घर से सारे दुख दर्द मिट गया कुछ बैंक का कर्ज था वो भी जल्द ही उतर गया मानो घर में बेटी नही साक्षात लक्षमी का अवतार है मै तो हमेशा उसे देखता ही रहता डयूटी पर मन ही नहीं लगता बस बेटी के लिए उदास रहता रात को भी अपनी छाती पर ही सुलाता श्री मति जी का दुध भी नही उतरा तो बकरी का कभी गाय का दुध ला कर देता पता नही क्यूँ बेटी के किसी भी काम की देरी नही होने देता उसके हर काम करने की खुशी होती ,परिवार वाले तो मुझे सनकी ही समझने लगते वास्तव में मै अपनी बेटी मे अपने आप को देखने लगा थोड़ी सी बड़ी हुई तो बिलकुल मेरा बचपन का चेहरा ही दिखता मैं सब कुछ भूल कर बस अपनी बेटी मे मग्न हो गया और बेटे की तरह पलने लगी दोनो बहन भाई खूब खेलते कभी लड़ते झगड़े तो डाँट सिर्फ बेटे को ही पड़ती क्योंकि वो बड़ा भी था और बेटी तो जैसे मेरी जान थी मैने अपनी पुरी जिंदगी में कभी भी उसे ना डाँटा और ना ही किसी को डाँटने दिया जैसे जैसे बड़ी होती गई पढ़ाई में बहुत होशियार और वैसे भी स्यानी चालाक थी अपनी मम्मी और दादी के संस्कार और मेरे प्यार से कब बड़ी हो गई पता ही नहीं चला बहुत सुंदर और समझदार थी कभी कभी मुझे भी डाँट देती लगता जैसे मेरी दादी है बेटा बड़ा था उसे डाक्टर बनाने में बहुत खर्च हो गया और कर्ज लेना पड़ा धीरे धीरे कर्ज उतर रहा था इतने में बेटी के डाक्टर एडमीशन में पैसे चाहिए थे सभी परिवार वाले कहते इसे डाक्टर मत बनाओ बहुत खर्च होता है इतने मे तो इसकी शादी हो जाएगी मैने सभी परिवार वालो की सुनी मेरी बेटी पुछती है पापा बेटी बेटा में क्या फर्क हैं भैया को सभी डाक्टर बनाना चाहते थे तो मै लड़की हूँ तो सब शादी की बात कर रहे हैं मै कुछ भी जवाब देने की स्थिति में नहीं था और अपनी छाती के साथ लगा कर रो पड़ा तू भी मेरा बेटा ही है 
मै तेरे को जरूर डाक्टर बनाऊगा चाहे कोई कुछ भी कहे हर समय भगवान से प्रार्थना करने लगा और अपने कार्य में भी ज्यादा मेहनत करने लगा कि कुछ रुपया जुड़ जाए तो बेटी भी डाक्टर बन जाए भगवान जी ने मेरी सूनी और मेरी भाग्यशाली बेटी का सरकारी कोटे से नंबर आ गया और कम पैसो से वो भी डाक्टर बन गई मै तो जैसे गंगा ही नही लिया मेरे दोनो बच्चों के पास एक समान डिग्री थी जिससे मुझे अपनी बेटी के आगे बेटा बेटी में कोई फर्क होता है यह भावना नही बनने दी लगन मेहनत और लक्ष्य से भगवान भी खुश होते हैं मेरे लिए अभिमान का सबसे बड़ा दिन भी आया जब मेरी बेटी मेरे ही हॉस्पीटल में मेरी ही अफसर बन कर आई सभी परिवार और शहर वालो ने मुझे और मेरी बेटी को मेरी बेटी मेरा अभिमान की बधाई दी ऐसी भाग्यशाली बेटी सब को दे,,,, 💐 

डाँ मोहन लाल अरोड़ा 
ऐलनाबाद सिरसा
********


©Mohan Lal Arora

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