⋇⋆✦⋆⋇ याद ⋇⋆✦⋆⋇
याद आते हो तुम...... कहना गलत होगा
बहुत याद आते हो तुम........😊
मेरे हर दिल की धड़कन तुम्हें याद करती है,
क्या तुम्हें भी हमारी याद आती हैं,
जितना,कि मैं तुम्हें याद करती हूँ उतना ?
अरे घबराओ मत यार ,मजाक कर रही हूँ,
⋇⋆✦⋆⋇ यादें ⋇⋆✦⋆⋇
तस्वीरों में कैद यादें बीते दिनों की
याद दिलाती रहती है,
हम रहे या ना रहे वह हमारी यादों
को उजागर करती रहती है,
हमें कभी भी एक दूसरे को भूलने नहीं देती हैं ,
किसी न किसी रूप में आकर
वह हमें याद दिला ही देती है।
⋇⋆✦⋆⋇ कदमों के निशान ⋇⋆✦⋆⋇
तुम्हारे कदमों के निशान. जहां जहां पड़े
मैं उसी निशान में,मैं अपने पैर के निशान
मिलाता हुआ चला, और तुम्हारे साथ इतनी
दूर निकल आया, मुझे पता तक नहीं चला ,
कि कब मैंने अपनी मंजिल को पा ली, तुम्हारे
कदमों के,निशान ने मेरा इतना साथ दिया कि
मेरा सफर पूरा हुआ, और जो बच्चे खूचें निशान
थे ,उनको समुंदर के पानी की लहरों ने मिटा कर
एक जान कर दिया, उससे पता ही नहीं चल रहा
कि कौन से निशान तुम्हारे और कौन से मेरे।
⋇⋆✦⋆⋇ जिसने हमें जिंदगी दी ⋇⋆✦⋆⋇
अपनी जान दांव पर लगाकर,
जिसने हमें ज़िंदगी दी ,
रात रात भर खुद जागकर, लोरी
गा- गा कर हमें सुलाया,
खुद गीले में सोकर हमें सूखे में
सुलाया,
धन्य है ऐसी मां जिसने हमें सीने
से लगाया,
खुद भूखी रहकर हमें खिलाया,
अपने आंचल की छांव में पनाह दी,
ऐसी माँ के चरणों में मेरे चारों धाम,
उन को मेरा बारं-बार प्रणाम🙏
⋇⋆✦⋆⋇ बेजुबान नहीं....... मौन हूं मैं ⋇⋆✦⋆⋇
तुमसे पूछती हूं.... कौन हूं मैं????
क्या तुम बता पाओगे???
तुम्हारी ही घर की इज्जत हूं मैं,
पराई नहीं तुम्हारी खुद की ही जान हूं मैं,
क्या हमेशा जुल्म सहती रहूं?????
जो बोलते हो वह सुनती रहूं?????
मुझे भी दर्द होता है, मुझे भी तकलीफ
होती है, तुम चाहते हो मैं मुंह से कुछ ना
बोलूं....
क्या मैं बेजुबान हूं.... घर की इज्जत ना
चली जाए,... घर ना बिखर ना जाए.....
सिर्फ इसलिए मौन हूं...... बेजुबान नहीं..
नहीं....तुम्हारी जान हुं मैं...............😊
⋇⋆✦⋆⋇ उम्मीदों से भरा बचपन ⋇⋆✦⋆⋇
उम्मीद से भरा बचपन पंख लगाए उड़ता,
मैं आसमान को छुऊगा ये सोच कर खुश होता,
गरीबी की मार तले नीचे दब जाता,लेकिन अपनी
उम्मीदों की सोच को, सोचने से कौन रोक पाता।
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⋇⋆✦⋆⋇ नंदी पे सवार भोले बाबा⋇⋆✦⋆⋇
नंदी पे सवार मेरे भोले आ गए,
एक हाथ में त्रिशूल एक हाथ में
डमरू बजाते हुए ,मेरे भोले आ गए,
गले में नाग लटकाए,शीश में गग बहाए,
जटा मैं चंद्रमा सोहे,तन पर भस्म रमाए,
मेरे भोले आ गए,राम नाम की माला जपते
हुए मेरे भोले आ गए।
⋇⋆✦⋆⋇✦⋆⋇
खुद भूखा रह जाएगा अपने भाई को पिलाऐगा
पानी के कटोरे को खाना बोल बोल कर अपने
भाई को खिलाएगा,
इस महामारी ने ऐसी हालत कर दी है ,
बेचारे गरीबों को रोटी तक नसीब नहीं है,
जो थोड़ा बहुत काम मिलता था,वह भी छूट
गया है ,
कमाने का साधन जो था वह भी लूट गया है,
पेट की आग सोने नहीं देती हैं,भूख है कि मरने
भी नहीं देती है,
ऐसी गरीबी की महामारी है,ना तन पे कपड़ा है,
ना सोने के लिए बिस्तर है,
बिस्तर छोड़ो एक चादर तक नसीब नहीं है,
ऐसे बेचारे बच्चों के नसीब में मां बाप का साया
तक नहीं है।
⋇⋆✦⋆⋇⋇⋆✦⋆⋇
अपनी बहन को कितने,
प्यार से खाना खिला रहा ,
अपना बड़ा भाई होने का ,
फर्ज निभा रहा खुद भुखा,
रह जाएगा लेकिन अपनी,
बहन को भूखा ना रहने,
देगा, मांग मांग कर दुनिया,
वालों से अपनी बहन का ,
पेट भर रहा,
तुम इतना अन्न,ना बिगाड़ो,
अगर बच जाए तो इन गरीब
लोगों को खिलाओ,
फेंकने से अच्छा ,इनके काम
आ जावो,
इनकी दुआओं से, अपना,
घर महकाओ।
©Deepti Garg
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