कृष्ण -राधा
मोहब्बत तुमसे 'सागर'से गहरी की है
अब साथ "शंख–शीप" सा देंगे हम....
मिलो की दूरी में रहकर भी उम्र- भर
बस तेरे ही 'ख्वाबों" में कैद रहेंगे हम....
पुकार लेना बंद आंखें कर दिल से तुम
उस पल तुम्हारें 'समक्ष' आजाएंगे हम...
गीली होगी याद में जब तुम्हारी आँखें
उस पल दूर रहकर भी साथ रोएंगे हम...
हर मंदिर, मस्जिद गिरिजा के आगे बस
तेरे लिए ही उम्र –भर सर झुकाएंगे हम...
तेरी संग ना सही पर "ए– मोहब्बत" तेरे
एहसास के दरमियान ताउम्र जिएंगे हम..
तेरे साथ "सांझा" किया नहीं लकीरों में
पर दिल में बस तुझे ही बसाए रखेंगे हम....
ना कभी मोहब्बत का इजहार करेंगे तुमसे
पर तुम में ही रहकर फना ताउम्र रहेंगे हम..
बस लिखेंगे खत को आंखों से इत्मीनान से
और दिल में उसे "कैद" कर छुपा लेंगे हम...
जब भी कोई झांकना चाहेगा दिल में हमारे
तो एक सौम्य "कृष्ण -राधा" सी छवि होगी
By : Monika Purohit

3 Comments
बहोत सुन्दर लिखा हैँ बहन 🙏
ReplyDelete👌👌💐
ReplyDeleteBehtareen diidi
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