नियत तेरी भी देखी गई होती
मोहब्बत चेहरे से कि ,दिल से होती तो अच्छा होता
फरेब-ऐ-मोहब्बत कि इश्क-ऐ-मोहब्बत कि होती तो अच्छा होता
अन्धेरे गलियों को अपना सवेरा समझ बैठे
चाँदनी रात तब आई होती तो अच्छा होता
आँखे बंद कर सुनहरे सपने देखे थे
काश तब आँखे खुली होती तो अच्छा होता
और अक्सर क्या इलजाम बेवफा का लगाते हो हम पर
नियत तेरी भी देखी गई होती तो अच्छा होता
Akanksha Pandey
2 Comments
Bhut khoob 👌
ReplyDeleteSukriya dost
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