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कविताएं (Volume 3) - Dolly Prasad

⋇⋆✦⋆⋇ रात की चादर  ⋇⋆✦⋆⋇ 

घनेरी रात की चादर में हम दोनों के बीच 
फासले बहुत लेकिन सिलवटें हजार थी!

चाँदनी की रौशनी मैं भी उदासी का मंजर,
छाया था तन्हाइयो से भरी रात अँधेरी थीं !

कुछ बात हम ना समझ सके,कुछ वो हमसे,
कह ना सके ना जाने किस बात की अहम थीं!

जब तक की उनसे हम कुछ कह पाते सुबह की,
लाली के साथ उससे दूर जाने की मजबूरी थीं !

दिल मे तो हज़ार शिकवा और शिकायत थीं पर, 
ज़ाहिर करने के लिए वो अब कहाँ हमारी अपनी थीं !

आँखों से अश्क़ो का सागर बहता रहा पर उसे 
क्या,खबर की तेरे इश्क़ मे तुझे याद कर हर रोज मरती थीं!


⋇⋆✦⋆⋇ रात के अँधेरे मे ⋇⋆✦⋆⋇ 

रात के अंधेरो मे मन का दीपक, 
क्यों बुझा-बुझा सा रहता है उम्मीद, 
की डोरी हाथो से छूटती जाती है !
और अपनों के शहर मे भी ये मन 
बेगाना सा रहता है विश्वास और 
धैर्य का आँचल हाथो से फिसलता 
जाता है, रह जाता एक टुटा आस जो 
उठ कर खड़े होने का साहस देता है !

मानवता के इस द्वेष और घृणा की,
भावन मे अपने अश्तित्व को ही 
भूलते जा रहे है,और अधर्म का मार्ग 
अपना रहे हैं अपने ही हाथो अपना 
जीवन को हम नर्क बना रहे है !

मनुष्य यदि अच्छा करे तो समाज उसे हर 
तरफ से गलत ठहरता है यदि बुरा करे तो 
उस पर चादर फेर कर दुनियाँ से छीपाता है 
दुनियाँ का यही दस्तूर पुराना है अमीरो की 
झूठी चाप्लूशी और गरीबो की महेनत को 
पैरों तले दबाना है, फिर लोग कहते है यही 
तो जमाना है ! 


⋇⋆✦⋆⋇ बचपन की कुछ हसींन यादे   ⋇⋆✦⋆⋇ 

बचपन की कुछ हसींन यादे को हम कभी, 
भी आँखों से ओझल और भूल नहीं पाते हैं|

देखती हूँ नन्हे बच्चों की शरारतो से भरी हरकतों,
को तो मेरी बचपन की स्मृति भोर नहीं पड़ती हैं|

आज भी वो गाँव के चौपाल पर बड़े बुजुर्गो साथ बैठ,
कर उनकी प्यारी सी कहानी को सुनना याद आता हैं|

कच्ची और पगडंडि रास्तो पर नंगे पांव ही मित्रो के, साथ खेत
खलिहान मे जाकर ठंडी हवा का लुप्त लेते हैं 

भूख लगने पर बगीचे से कुछ फल चुरा लेते और 
प्यास लग जाने पर खेत के पम्प से ही प्यास बुझा लेते हैं|

बारिश की पहली बूंदो के साथ भींग कर कागज़ की,
कस्ती बनाकर छोटी छोटी खुशियों मे ही ख़ुश हो जाते हैं|

खेल खेल मे मित्रो से अनबन हो जाती थीं फिर, 
भी थोड़ी देर मे सारी नाराजगी दूर हो जाती हैं


⋇⋆✦⋆⋇ महावारी..... अभिशाप नहीं अभिमान है  ⋇⋆✦⋆⋇ 

महावारी अभिशाप नहीं अभिमान है, 
हर नारी के नारीत्व की पहचान है 
जिसने ना जाना नारी के दर्द, 
को वह क्या खाक इंसान है|

नारी के सहन शक्ति को ताकत के, 
रूप में समाज को इज्जत मिलनी चाहिए,
वहाँ रूढ़िवादिता की सोच से महज एक, 
दाग और कमजोरी समझी जाती है|

समाज में कुछ बुद्धिजीवी और पौराणिक
नियमों में देश की दशा को ही बिगाड़ कर
रख दिया है, कुछ लोग माहवारी को एक
मजाक का विषय लेते हैं, खुद को माहवारी 
शब्द कहते हुए भी शर्मनाक महसूस करते हैं

मासिक धर्म के समय जहां लड़कियों की 
मानसिक एवं सक्रियात्मक रूप से उनका
खास ख्याल रखना चाहिए उन दिनों उन्हें
कहा जाता है |

कि भगवान की पूजा करना मना है,
अशुद्ध हो जाएंगे, तुलसी के पौधे 
को मत छूना मुरझा जाएगी, अचार मत
छूना खराब हो जाएगी, मंदिर मत जाना 
पाप लगेगा,आखिर यह छुआछूत की 
भावना इन दिनों क्यों होती है ? केवल 
स्त्री के साथ ही क्यों ? 


⋇⋆✦⋆⋇ नारी तेरे अनेक रूप  ⋇⋆✦⋆⋇ 

नारी तेरे अनेक रूप तुम्हे हर आयाम
को अपने नाम करना है आज का,
युग हो या त्रेता युग हो, द्रौपद युग हो, 
हर युग को अपने नाम करना है !

अपनी आजादी के लिए संघर्षो से नीव 
के बल पर प्रगति की ओर अग्रसर होना, 
है समाज़ की हर रूढ़िवादी सोच को पीछे, 
छोड़ कर साहस के साथ बढ़ते जाना है !

नारी तुम खुद को इस संसार मे कमजोर 
और असहाय मत समझो तुम जननी हो, 
इस संसार की निर्भीक होकर दुष्टों का नर,
संहार करना है.नारी का पहचान कराना है!

तुम ही जगत की पालन कर्ता तुम्हे अपने 
कर्मो के बल पर नया इतिहास रचना है.. 
सच्चाई की मार्ग दिखलाने वाली गीता तुम हो 
रामायण तुम हो अपना सर्वस्व न्यौछावर करना है !

पति के लिए करवा चौथ का उपवास ऱखकर, 
लाल रंग को मांग मे ख़ुशी से सज़ा लेती है.., 
बच्चो की दीर्घ आयु की ख़ातिर माताए जूतिया का 
निर्जला व्रत ऱखकर बच्चों की बलाए हर लेती है !

सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ा कर पुरे भारत 
को शिक्षित कर देती है जग मे पुरुषो के साथ 
कदम मिलाकर चलती है तुम्हे ही प्रतिमान का 
नवीन सृजन को धैर्य से गढ़ना होगा. नारी हूँ 
अकेले ही हजारों मनुष्य पर भारी है..... .. !

 आशा करती हूं कि सभी मित्रों को मेरी यह कविता 
अवश्य ही पसंद आई होगी......🙏🙏🙏🙏🙏
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⋇⋆✦⋆⋇ मीठा जहर   ⋇⋆✦⋆⋇ 

इश्क में वफा करके हमने मीठा, 
जहर को भी गले से लगाया है!

उसकी मधुर सी बातों में आकर, 
उसने मेरा दिल उसने चुराया है!

उसकी नशीली आँखों के जादू ने, 
इस कदर हमको दीवाना बनाया है!

सादगी से भरी मतवाली चाल पर ही तो, 
इस आशिक ने बेपनाह प्यार लुटाया है!

मैं जानता हूँ वो बेवफाई करेगी फिर भी, 
मैंने उसका प्यार दिलो जान से निभाया है!

मेरे दिल की चौखट पर सिर्फ उसके ही, 
एक नाम ने पहला दस्तक खटखटाया है!

दूर रह कर भी मैंने प्यार करने,
का एक भी मौका ना गवाया है!


©Dolly Prasad 

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